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February 18, 2023, 7:18 pm
KHABAR : अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच नई दिल्ली ने कनावटी में किया धर्मसभा का आयोजन, राष्ट्र संत कमल मुनि कमलेश ने कहा- बदले की भावना दुर्गति का प्रमुख कारण होती है, पढ़े खबर 

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नीमच। बदले की भावना के त्याग बिना मनुष्य जीवन में सद्गति नहीं होती है और आत्मा का कल्याण नहीं होता है। इसलिए मनुष्य को किसी भी घटनाक्रम होने के बाद बदले की भावना नहीं रखनी चाहिए जीवो पर दया करनी चाहिए और माफी कर क्षमा दान देना चाहिए। क्षमादान देने वाला महान होता है बदले की भावना दुर्गति का प्रमुख कारण बनती है। इसलिए बदले की भावना से सदैव बचना चाहिए और सदैव सभी का भला करना चाहिए। बुरा करने वाले को जीवन में भूल सुधार करने का अवसर देना चाहिए तभी संसार में मानवता सार्थक सिद्ध हो सकती है।
यह बात राष्ट्रसंत कमल मुनि कमलेश ने कही। वे शनिवार सुबह 12 बजे कनावटी जेल में अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच नई दिल्ली द्वारा   आयोजित धर्मसभा में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि 80000 किलोमीटर पैदल चलकर आपसे मिलने आया हूं। जेल में कैदियों को कैदी नहीं प्रेमी तथा कारागृह नहीं सुधार ग्रह का उल्लेख करना चाहिए। निर्दोष अज्ञानता मजबूरी बुरी संगति से अपराधी का जन्म होता है। जन्म से कोई अपराधी नहीं होता है कभी-कभी हालात व्यक्ति करने पर मजबूर कर देते हैं। पानी का कोई रंग नहीं होता है। इसलिए सदैव अच्छी सत्संग में रहना चाहिए और अच्छे कार्य करना चाहिए तभी मानव जीवन सफल सार्थक सिद्ध होता है। नई पीढ़ी पानी के समान होती है। यदि वह बुरी संगति में रहेगी तो बुराई की ओर जाएगी और अच्छी संगति में रहेगी तो अच्छे आदमी बनकर अच्छाई की तरफ आगे बढ़ेगी बड़े व्यक्ति सदैव अच्छे कार्य करें तो छोटे बच्चे भी उनको देखकर संगत का असर होता है। अच्छा बुरा व्यक्ति के हाथ में होता है चाहे तो अच्छा बन सकता है कि चाहे तो बुरा बन सकता है। व्यक्ति चाहे रुखा सुखा खाए लेकिन सत्संग में अवश्य रहे ।पांच पकवान भी मिलते हो तो बुरी संगत नहीं करना चाहिए जुआ सामाजिक बुराई है इससे सदैव बचना चाहिए। इससे घर परिवार सब बर्बाद हो जाता है इसलिए यह सामाजिक बुराई है इससे सदैव बचना चाहिए शराब आदमी को राक्षसी प्रवृत्ति की ओर ले जाती है भगवान राम 14 वर्ष वनवास में रहे राम हनुमान मंदिर में फल फूल मिठाई चलाते हैं पत्थर के राम मंदिर में बीड़ी गुटखा सिगरेट नहीं चढ़ता तो हम जीते जी इंसान को क्यों बीड़ी सिगरेट पिलाते हैं चिंतन का विषय है रावण ने एक बार सीता का अपरहण किया तो आज तक उस के पुतले को जलाया जा रहा है इसलिए सामाजिक बुराई के कार्यों से सदैव बचना चाहिए और समाज में अच्छे कार्य करना चाहिए तभी हम राम की तरह याद किए जा सकते हैं नशा सामाजिक बुराई है इसे सदैव बचना चाहिए कड़ाके की सर्दी में देश की रक्षा के लिए सीमा पर जवान अपना खून बहा देता है और हम देश के लिए क्या कर रहे हैं चिंतन का विषय है जितने लोग आतंकवाद से नहीं मरते हैं उतने लोग शराब के नशे से मर रहे हैं परिवार देश सब बर्बाद होता है इसलिए नशे  से बचना चाहिए तभी हमारे देश का विकास हो सकता है सरकार नशा मुक्ति की पहल करें तो समाज में सुधार हो सकता है ।अच्छे कर्मों का फल सदैव मिलता है इससे कोई भी बच नहीं पाया है राम को भी अपने कर्मों का फल भुगतना पड़ा ।पढ़ाई कर दुआ लेना अच्छा कार्य है लेकिन बुराई कर पाप लेना बुरा कार्य है राजा दशरथ के तीर से श्रवण कुमार की मृत्यु हो गई थी तो राजा दशरथ ने अपने अपराध को स्वीकार किया था अपने अपराध को स्वीकार करने में ही मनुष्य की भलाई होती है। माफी मांगने की आदत होनी चाहिए उसकी जिंदगी सफल होती है। इंसान के लिए पशुओं के साथ ही खराब होते हैं बैर बदला कभी समाप्त नहीं होने वाला है नशे का व्यापार पाप है इससे परिवार बर्बाद होते हैं ऐसे सामाजिक दिखावे से बचना चाहिए बुरे कर्म का फल बुरा ही मिलता है इससे कोई बच नहीं सकता है। संत नहीं बन सकते कोई बात नहीं लेकिन सज्जन व्यक्ति बंद कर देश में अच्छा कार्य तो कर सकते हैं और एक देश के अच्छे नागरिक बन कर अपना नाम रोशन कर सकते हैं।
हम गौ माता की रक्षा करते हैं तो परिणाम स्वरूप गौ माता हमारे जीवन में आने वाले संकट से हमारी रक्षा कर करती है जीवन में प्रत्येक व्यक्ति को धूम्रपान मदिरापान बीड़ी सिगरेट गुटका  तंबाकू जैसी सामाजिक बुराई का सदैव त्याग करना चाहिए और किसी व्यक्ति को नशे लत लग जाए तो उसे भी छुड़ाना चाहिए। तभी नशा मुक्त राष्ट्र का निर्माण हो सकता है। साधु संतों सत्संग के सानिध्य में रहने से बुरे व्यक्ति के जीवन में भी सुधार हो सकता है हरी सब्जियां और दाल का उपयोग करना चाहिए। मांसाहार से सदैव बचना चाहिए। तभी जीवन का कल्याण हो सकता है और मन पवित्र हो सकता है। तामसिक भोजन से बचना चाहिए। विदेशों में गौशाला में गाय के पास जाने के लिए 18000 की फीस लगती है। गौमाता कितनी पवित्र है यह बात पूरे विश्व में सामने आ गई है। नफरत दुर्भावना फैलाती है। नफरत समाज के लिए घातक है। प्रेम भक्ति सद्भाव सदैव सफलता दिलाता है। बदले की भावना से किसी भी व्यक्ति का अच्छा नहीं होता है। भलाई के कार्य नम्रता से सदैव सभी सुखी रहते हैं। हमारे सेवा से लोग खुश होना चाहिए। हम कभी भी ऐसा कोई कार्य नहीं करें जिससे किसी को भी दुख हो, हम सभी को भलाई और अच्छे कर्म करना चाहिए तभी हमारा कल्याण हो सकता है। सकारात्मक विचार से प्रकृति भी प्रभावित होती है। हम किसी का भी बुरा नहीं करें ताकि बाद में हमें पछताना पडे। कभी भी अत्याचार होने पर न्याय की सहायता लेनी चाहिए तभी हमारा जीवन सफल हो सकता है। न्याय में सुनवाई में देर हो सकती है अंधेर नहीं होता है वहां सदैव न्याय मिलता है। गौ माता के पशुपालन के  सानिध्य में कैंसर रोग ठीक हो जाता है इसलिए जेल प्रशासन से आह्वान किया जाता है कि जेल में गौशाला  निर्माण की स्वीकृति प्रदान करें भविष्य में गौशाला का निर्माण किया जाएगा तो यहां रहने वाले सभी लोग स्वस्थ रहेंगे। इस अवसर पर राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश का  सम्मान कर आशीर्वाद ग्रहण किया गया।इस अवसर पर कनावटी जेल प्रभारी अधीक्षक  ने कहा कि जेल प्रशासनिक विभाग द्वारा गौशाला योजना की प्रस्तावना 5 माह पूर्व राज्य सरकार को प्रेषित की गई है शीघ्र ही स्वीकृति मिलते ही इस पर कार्य योजना को प्रारंभ किया जाएगा और गौशाला निर्माण कार्य की स्वीकृति के लिए प्रयास किए जाएंगे।

धर्म सभा में जैन संत घनश्याम मुनि जी महाराज साहब ,गौतम मुनि जी महाराज साहब ,जेलर प्रभात कुमार, सहायक जेल अधीक्षक डॉ अंशुल गर्ग,जेल प्रभारी अधीक्षक , वीरवाल समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश वीरवाल, श्रेयांश लोढ़ा, सत्यनारायण पाटीदार, कनावटी,अनिल चौरसिया,अखिल भारतीय जायसवाल महासभा के राष्ट्रीय सचिव अर्जुन सिंह जायसवाल, माया वीरवाल ,शोभाराम वीरवाल , आदि गणमान्य लोग उपस्थित थे। धर्म सभा के पश्चात राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश द्वारा उपस्थित सभी लोगों को नशा मुक्ति का संकल्प दिलाया गया। 

संत श्री ने कहा ने ज्ञानोदय विद्यालय प्रशासन से आह्वान किया है कि शिक्षाप्रद फिल्मों का प्रसारण जेल में करवाने में सहयोग प्रदान करें। तथा जेल परिसर में ट्री गार्ड युक्त पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया जाए। स्वस्थ जीवन के लिए खुले जिम मशीन स्थापना तथा बगीचा विकास  के प्रयास भी किए जाएं। संत श्री द्वारा मांगलिक श्रवण करवा आशीर्वाद प्रदान कर सभी के स्वस्थ जीवन की कामना की गई। तत्पश्चात फल का वितरण किया गया।
कमलमुनि को अष्टावक्र की उपाधि से अलंकृत किया, राष्ट्र संत कमल मुनि कमलेश को धर्म सभा में अष्टावक्र की उपाधि प्रदान कर सम्मानित किया गया।

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