मुरैना। चंबल नदी में अवैध रेत खनन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने को लेकर मुरैना में केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) के सदस्य सुनील कुमार लिमिए ने महत्वपूर्ण बैठक ली। बैठक में मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के पुलिस, वन विभाग और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान तीनों राज्यों में अवैध रेत खनन की मौजूदा स्थिति का फीडबैक लिया गया और खनन रोकने के लिए लगाए गए आधुनिक AI टावर के प्रभावी उपयोग को लेकर सुझाव दिए गए।
दरअसल, चंबल नदी में लगातार हो रहे अवैध रेत खनन को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले भी गंभीर चिंता जता चुका है। न्यायालय ने रेत माफिया की गतिविधियों को जलीय जीवों के अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा मानते हुए मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश की सरकारों को कड़ी फटकार लगाई थी। इसके बाद तीनों राज्यों में पुलिस, प्रशासन, वन और खनिज विभाग की संयुक्त टीमों ने चंबल नदी पर निगरानी बढ़ाई।
4 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में पेश होगी रिपोर्ट
केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति के सदस्य सुनील कुमार लिमिए द्वारा 4 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट प्रस्तुत की जानी है। इसके आधार पर चंबल नदी में अवैध रेत खनन को लेकर आगे सुनवाई होगी। बैठक में तीनों राज्यों के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और डीएफओ सहित संबंधित अधिकारियों से अवैध खनन रोकने के लिए की गई कार्रवाई की जानकारी ली गई।
अधिकारियों का दावा है कि पहले की तुलना में अवैध खनन में कमी आई है, हालांकि इसे पूरी तरह बंद कर पाना अब भी चुनौती बना हुआ है।
मुरैना में 40 वैकल्पिक रेत खदानों की लीज
मुरैना कलेक्टर के अनुसार, पुलिस अधीक्षक, डीएफओ और अन्य विभागों की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं। अवैध रेत के विकल्प के रूप में 40 एम-सैंड लीज दी जा चुकी हैं, जिनमें 6 लाख मीट्रिक टन से अधिक सामग्री का स्टॉक उपलब्ध बताया गया है।
इसके बावजूद मुरैना शहर सहित कई क्षेत्रों में चंबल नदी की रेत पहुंचने की जानकारी सामने आ रही है। ऐसे में अवैध परिवहन और सप्लाई चेन पर प्रभावी रोक लगाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
श्योपुर में रेत माफिया पर कार्रवाई को लेकर सवाल
चंबल नदी से अवैध रेत खनन के मामले में भिंड, मुरैना और श्योपुर जिले लंबे समय से चर्चा में रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद भिंड और मुरैना में कुछ हद तक असर देखने को मिला है, लेकिन श्योपुर में अवैध खनन जारी रहने के आरोप सामने आ रहे हैं।
आरोप है कि रेत माफिया अब केवल ट्रैक्टर-ट्रॉलियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि डंपरों के माध्यम से भी रेत की सप्लाई सरकारी ठेकेदारों तक पहुंचाई जा रही है। कई सरकारी भवनों और शासकीय परियोजनाओं में भी चंबल नदी से निकाली गई कथित अवैध रेत के उपयोग के आरोप हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
अब सभी की निगाहें 4 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में पेश होने वाली CEC की रिपोर्ट पर टिकी हैं। यह रिपोर्ट चंबल में अवैध खनन रोकने के लिए तीनों राज्यों द्वारा उठाए गए कदमों और उनकी प्रभावशीलता के आकलन में महत्वपूर्ण होगी।