GROUN ZERO : काफी मददगार है जम्मू-कश्मीर पुलिस, पढ़िए कैसे मदद कराती है पुलिस सैलानियों की, कश्मीर से लौटकर अब्दुल हुसैन बुरहानी की रिपोर्ट

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GROUN ZERO : काफी मददगार है जम्मू-कश्मीर पुलिस, पढ़िए कैसे मदद कराती है पुलिस सैलानियों की, कश्मीर से लौटकर अब्दुल हुसैन बुरहानी की रिपोर्ट

नीमच :-

कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और हर भारतीय की ख्वाहिश होती है की एक बार ज़मीन की जन्नत कश्मीर को ज़रूर देखे बीते दिनों वॉइस ऑफ़ एमपी के जांबाज़  रिपोर्टर अब्दुल हुसैन बुरहानी  आठ दिन की कश्मीर यात्रा पर गए थे वहा उन्होंने जम्मू कश्मीर में घूमते हुए वहा के हालातो का जायजा लिया ग्राउंड ज़ीरो से यह ख़ास रिपोर्ट आपके लिए कश्मीर क्या बोला PART 3

जब भी कोई हादसा या घटना यदि हमारे साथ घटित होती है या टूरिस्ट के साथ कुछ भी गलत होता है तो जम्मू कश्मीर पुलिस एवं यहां की टूरिस्ट पुलिस तुरंत एक्शन लेकर हर संभव सहायता करते हैं।टूरिस्ट एवं आम हिंदुस्तानी की मदद का जज्बा इनमे जेसे कूट कूट कर भरा हुआ है।यह बात मैंने तब महसूस कि जब हमारे साथ जम्मू कश्मीर से से पहलगाम में एक घटना घटी।

यह थी घटना
हुआ यूं कि जब हम श्रीनगर से पहलगाम पहुंचे  तो हमारी टैक्सी वाले ने हमें पहलगाम के टैक्सी स्टैंड तक लाकर वहां की पार्किंग में छोड़ दिया।अब यहां से आगे जहां घूमने जाना है तो पहाड़ों पर संकरे एवं जोखिम भरे रास्तों पर घोड़ों पर बैठ कर जाना होता है।यह एडवेंचरस यात्रा होती है जहां घोड़ो पर बिठाकर आपको ऊंची पहाड़ियों पर कई दार्शनिक स्थल एवं गार्डन है वहां ले जाया जाता है।काफी सँकरे रास्ते होने के कारण एक वक्त में उस रास्ते से केवल एक घोड़ा जा सकता है।वह भी इतना खतरनाक रास्ता की घोड़े का एक पाँव अगर इधर से उधर हुआ तो सीधे नीचे खाई में गिरने का डर रहता है।

आमतौर पर ऐसे खतरनाक रास्ते पर पांच घोड़ों के साथ कम से कम तीन या चार लोग रहते हैं जो वक्त पड़ने पर घोड़ों को संभाल लेते हैं।हमारे साथ भी तीन लोग थे लेकिन उसमें से एक घोड़े वाला बदमाश था।जिसने हमें पता ही नहीं चला कि कब बाकी के दो घोड़े वाले को वहां से रवाना कर दिया एवं वह 5 घोड़ो को अकेला लेकर चलने लगा। उसने रास्ते में  हमारे परिवार की एक लेडीस के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश की।तब मेरे परिवार की सदस्य ने मुझे इस बात की जैसे ही जानकारी दी तो मैंने सोचा कि हम लोग जब अपने शहर में होते हैं तब भी सच्चाई एवं इंसाफ के लिए आवाज उठाते हैं तो यहां क्यों नहीं?अगर हमने उसकी शिकायत नहीं की एवं उसको सबक नहीं सिखाया तो वह अन्य टूरिस्ट के साथ भी  भी ऐसा ही करेगा।तब मैंने उस एरिया में ड्यूटी पर तैनात पुलिस अफसर को इस घटना की जानकारी दी। और थाने में पहुंच कर वहां ड्यूटी पर तैनात इस्पेक्टर हैदर अली साहब को जब मैंने घटना के बारे में बताया तो उन्होंने तुरंत टूरिस्ट पुलिस को इस बात की इत्तेला कर दी।टूरिस्ट पुलिस ऑफिस पहुंच कर वहां इंस्पेक्टर मुश्ताक अहमद साहब एवं शब्बीर एहमद साहब ने तुरंत रिपोर्ट दर्ज की एवं यह कहा कि साहब बड़े शर्म की बात है कि एक घोड़े वाले ने इस तरह से बदतमीजी की है।

चूँकि हमारे पास घोड़े वाले का फोटो था अतः तुरंत पुलिस ने उसको खोजना शुरू किया।पुलिस ने रात को 2:00 बजे घोड़े वाले को जैसे ही वह घर आया उसे तुरंत धर दबोचा।उसे थाने लाया गया अच्छी तरह से उसकी मरम्मत की गई एवं उस पर एवं उसके एक अन्य साथी पर 3000 का जुर्माना किया गया।एवम उसकी गिरफ्तारी एवं जुर्माने की पार्टी की रसीद के फोटो मुझे रात में ही WhatsApp किए गए।

सुबह वहां के सबसे बड़े ऑफिसर एसपी अमरजीत सिंह साहब का फोन आया कि क्या आप हमारे द्वारा की गई कार्यवाही से संतुष्ट हैं तो मैंने कहा जी हां।मैंने उनका व पूरे जम्मू-कश्मीर के पुलिस महकमे का शुक्रिया अदा किया।

ऐसी ज़िम्मेदार पुलिस के जज़्बे को दिल से सलाम
पूरे घटना क्रम में मैंने महसूस किया कि वहां की पोलिस की टूरिस्ट के प्रति  जिम्मेदारी एवं वफादारी का जोश देख कर ये एहसास  हो गया कि ऐसे जिम्मेदार पुलिस अफसरों के रहते किसी टूरिस्ट का बाल भी बांका नहीं हो सकता तथा निडर होकर जम्मू कश्मीर पर्यटन हेतु जाया जा सकता है।देश की ऐसी जिम्मेदार पुलिस एवं ऑफिसरों के जज्बे को सलाम।


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