उज्जैन। ग्वालियर स्थित भारतीय पर्यटन एवं यात्रा प्रबंध संस्थान टूरिज्म बोर्ड की ओर से पंडे-पुजारियों को लेकर की गई टिप्पणी पर अखिल भारतीय पुजारी महासंघ ने कड़ा विरोध जताया है। महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश पुजारी ने संस्था से बयान वापस लेकर सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा नहीं होने पर संस्था के खिलाफ मानहानि और एफआईआर जैसी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
महेश पुजारी ने बताया कि टूरिज्म बोर्ड के हवाले से प्रकाशित एक खबर में कहा गया था कि सिंहस्थ के दौरान पंडे-पुजारी श्रद्धालुओं के साथ ‘नो-नो’ न करें और ड्राइवर मनमानी न करें, बल्कि मुस्कुराकर ‘जय महाकाल’ बोलें। महासंघ ने इस टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए ‘पंडे-पुजारी नो-नो’ शब्द का स्पष्ट अर्थ बताने की मांग की है।
महासंघ ने कहा- तीर्थों की व्यवस्था पुजारियों से जुड़ी
महेश पुजारी ने कहा कि तीर्थ स्थल और मंदिरों की परंपरा व व्यवस्था में पंडे-पुजारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। देशभर से आने वाले श्रद्धालु अपने पारंपरिक पंडों के माध्यम से धार्मिक कर्मकांड करवाते हैं और ब्राह्मणों से आशीर्वाद लेते हैं। उन्होंने दावा किया कि श्रद्धालुओं के साथ पुजारियों का व्यवहार हमेशा सम्मानजनक और विनम्र रहता है। महासंघ ने अधिकारियों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर भी सवाल उठाए। संगठन का आरोप है कि सिंहस्थ जैसे बड़े आयोजनों में कई बार नौसिखिए अधिकारियों और पुलिस व्यवस्था के कारण श्रद्धालुओं को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
महासंघ ने कहा कि भीड़ प्रबंधन के नाम पर कई बार श्रद्धालुओं को मुख्य मंदिरों तक पहुंचने में परेशानी होती है। आरोप लगाया गया कि भक्तों को दूर से दर्शन करवाकर वापस भेज दिया जाता है और कई श्रद्धालुओं को लंबी दूरी तक पैदल चलना पड़ता है।
महासंघ ने संस्था को नसीहत देते हुए कहा कि पंडे-पुजारियों पर टिप्पणी करने से पहले अधिकारियों और व्यवस्थाओं में सुधार पर ध्यान देना चाहिए। फिलहाल इस बयान को लेकर विवाद बढ़ता नजर आ रहा है।