नीमच। जिले की चंगेरा स्थित कृषि उपज मंडी में शुक्रवार को लहसुन के भावों में आई 250 से 400 रूपए की गिरावट ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।पहले ही भाव में काफी गिरावट है। आज लगभग 12,000 बोरी की आवक के बाद आई नरमी ने किसानों को निराश कर दिया है। किसान कह रहे हैं कि उन्हें अपनी फसल का दाम कौड़ियों के हिसाब से मिल रहा है, जबकि लागत भी पूरी नहीं हो पा रही है।

आज मंडी में लहसुन का अंटी माल 1,800 से शुरू होकर 2,800 प्रति क्विंटल तक बिका, जबकि मीडियम क्वालिटी 3,000 से 3,200 रही। अच्छी क्वालिटी का मोटा माल 7,800 से 8,500 और बॉक्स पैकिंग का लहसुन 10,000 तक बिका। हालांकि, कुछेक ढेर 12,000 से अधिक में भी बिके, लेकिन अधिकांश किसानों को निराशा ही हाथ लगी है।मंडी में मौजूद किसानों ने श्वॉईस ऑफ एमपीश् से बातचीत में अपना दर्द साझा किया। एक किसान ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि वर्तमान भावों से लागत तक नहीं निकल पा रही है। हमें कम से कम प्रति क्विंटल दो से तीन हजार रुपए अधिक की अपेक्षा है। किसानों का सबसे बड़ा आरोप यह है कि मंडी में उनकी फसल को कम दाम में खरीदा जाता है, लेकिन यही माल जब व्यापारी के पास पहुंचता है तो इसके मूल्य आसमान छूने लगते हैं।

उन्होंने सरकार से मांग की है कि इस पर तुरंत ध्यान दिया जाए। इस निराशाजनक माहौल के बीच विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार लंबी बारिश के कारण नई फसल देरी से आएगी, जिससे पुराने स्टॉक की मांग बढ़ेगी। उनकी सलाह है कि यदि किसान अपना बचा हुआ माल एक साथ मंडी में लाने के बजाय धीरे-धीरे लाते हैं, तो आने वाले समय में लहसुन के भावों में एक बड़ी तेजी देखने को मिल सकती है। इसके विपरीत यदि किसान एक साथ माल लेकर पहुंचते हैं, तो भावों का गिरना निश्चित है।
