मंदसौर। करीब 13 दिनों के लंबे इंतजार के बाद मंदसौर जिले में मानसून एक बार फिर मेहरबान हो गया है। बुधवार दोपहर बाद जिला मुख्यालय सहित जिले के अधिकांश क्षेत्रों में रुक-रुककर झमाझम बारिश हुई, जिससे लोगों को गर्मी और उमस से राहत मिली। वहीं, खरीफ फसलों के लिए यह बारिश किसी संजीवनी से कम नहीं मानी जा रही है। किसानों ने भी बारिश शुरू होते ही राहत की सांस ली है।
जिला मुख्यालय के अलावा नाहरगढ़, भावगढ़, गरोठ, सुवासरा, शामगढ़, दलौदा, मल्हारगढ़, पिपलिया मंडी, नारायणगढ़, डिगांव, बरखेड़ा और अफजलपुर सहित जिले के अधिकांश क्षेत्रों में अच्छी बारिश दर्ज की गई। पिछले करीब दो सप्ताह से प्रभावी वर्षा नहीं होने के कारण खेतों में नमी की कमी महसूस की जा रही थी, जिससे किसान चिंतित थे। अब बारिश होने से फसलों को पर्याप्त नमी मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।
जिले में इस मानसून सीजन में अब तक औसतन 10.84 इंच वर्षा दर्ज की गई है, जबकि गत वर्ष इसी अवधि तक 12.91 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई थी। इस प्रकार इस वर्ष अब तक लगभग दो इंच कम वर्षा हुई है। हालांकि मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले चार से पांच दिनों तक मानसून सक्रिय बना रहेगा, जिससे वर्षा के आंकड़ों में तेजी से बढ़ोतरी हो सकती है।
बारिश की कमी का असर जिले के प्रमुख जल स्रोतों पर भी दिखाई दे रहा है। जलस्तर अभी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाया है। इसी कारण शहर में फिलहाल एक दिन छोड़कर पेयजल आपूर्ति की जा रही है। नगर पालिका ने नागरिकों से जल संरक्षण करने तथा पेयजल वितरण के दौरान विद्युत मोटर का उपयोग नहीं करने की अपील की है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आगामी दिनों में इसी प्रकार बारिश होती रही तो सोयाबीन, मक्का सहित अन्य खरीफ फसलों की बढ़वार बेहतर होगी और उत्पादन पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों के दौरान जिले में गरज-चमक के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने तथा कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने की संभावना जताई है। प्रशासन ने निचले क्षेत्रों में जलभराव और आकाशीय बिजली की आशंका को देखते हुए नागरिकों से सतर्कता बरतने की अपील की है।
इन्द्रदेव प्रार्थना-कीर्तन यात्रा कल-
अल्प वर्षा की स्थिति को देखते हुए सर्व समाज के तत्वावधान में गुरुवार सुबह 9 बजे बालागंज स्थित तलाई वाले बालाजी मंदिर से इन्द्रदेव प्रार्थना-कीर्तन यात्रा निकाली जाएगी, जो पशुपतिनाथ मंदिर पहुंचकर सम्पन्न होगी। आयोजकों ने बताया कि बारिश होने की स्थिति में भी यात्रा पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही निकाली जाएगी। विभिन्न सामाजिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक संगठनों ने इसे जनकल्याण, सर्वधर्म सौहार्द और पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक बताते हुए अधिक से अधिक लोगों से इसमें शामिल होने का आग्रह किया है।