चित्तौड़गढ़। इंजीनियर्स डे के अवसर पर विश्व की सबसे बड़ी एकीकृत जिंक उत्पादक और विश्व की शीर्ष 10 सिल्वर उत्पादक कंपनियों में शामिल हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड ने अपने युवा इंजीनियर्स की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। कंपनी के अनुसार युवा इंजीनियर्स भारत के मेटल एवं माइनिंग उद्योग को तकनीकी बदलाव, नवाचार और डिजिटल तकनीकों के माध्यम से नई दिशा देने में योगदान दे रहे हैं।
वर्तमान में हिंदुस्तान जिंक के कुल अधिकारियों में 57.8 प्रतिशत अधिकारी इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि से हैं। कंपनी के युवा प्रोफेशनल्स में 76 प्रतिशत कोर इंजीनियरिंग क्षेत्रों से जुड़े हैं, जबकि लगभग 10 प्रतिशत नेतृत्वकारी भूमिकाओं में कार्यरत कर्मचारी 35 वर्ष से कम आयु के हैं। कंपनी के अनुसार युवा इंजीनियर्स तकनीकी ज्ञान, डिजिटल कौशल, नवाचार और सतत विकास की सोच के साथ मेटल एवं माइनिंग उद्योग में आधुनिक, स्मार्ट और सुरक्षित कार्यप्रणाली विकसित करने में भूमिका निभा रहे हैं।
पारंपरिक रूप से मेटल एवं माइनिंग उद्योग को मशीनों, प्रक्रियाओं और संचालन विशेषज्ञता पर आधारित क्षेत्र माना जाता रहा है। हालांकि, कंपनी के अनुसार आज युवा इंजीनियर्स नई तकनीकों के माध्यम से उद्योग में बदलाव ला रहे हैं। हिंदुस्तान जिंक की विभिन्न इकाइयों में रिमोट ब्लास्टिंग, टेली-रिमोट मशीन संचालन, रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम, ऑटोमेटेड प्रक्रियाएं और डिजिटल कंट्रोल रूम जैसी तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इन तकनीकों के संचालन और विकास में युवा इंजीनियर्स की भूमिका महत्वपूर्ण है।
हिंदुस्तान जिंक के कुल 2,685 अधिकारियों के कार्यबल में से 1,551 कर्मचारी इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि से हैं। कंपनी में महिला अधिकारियों की हिस्सेदारी 20.5 प्रतिशत है, जो माइनिंग, मेटलर्जी, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल एवं पर्यावरण इंजीनियरिंग सहित विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं। कंपनी ने वित्त वर्ष 2025-26 में 335 कैंपस हायरिंग के माध्यम से नई तकनीकी प्रतिभाओं को संगठन से जोड़ा है।
इस अवसर पर हिंदुस्तान जिंक के सीईओ एवं पूर्णकालिक निदेशक अमरेंदु प्रकाश ने कहा कि आज का इंजीनियर ऐसे उद्योग में कदम रख रहा है, जो तेजी से बदल रहा है। हिंदुस्तान जिंक में युवा इंजीनियर्स नई सोच और दृष्टिकोण के साथ जटिल चुनौतियों के समाधान तलाश रहे हैं। कंपनी का प्रयास है कि उन्हें ऐसा वातावरण मिले, जहां उनकी जिज्ञासा, तकनीकी क्षमता और महत्वाकांक्षा नवाचार में बदल सके तथा मेटल एवं माइनिंग उद्योग के भविष्य को मजबूत करने में योगदान दे।
कंपनी के अनुसार हिंदुस्तान जिंक के 62 प्रतिशत से अधिक कर्मचारी 35 वर्ष से कम आयु के हैं, जबकि लैंगिक विविधता अनुपात 26.3 प्रतिशत है। कंपनी युवा प्रतिभाओं को जिम्मेदारी, सीखने के अवसर और नवाचार के लिए स्वतंत्रता देने वाला कार्यस्थल विकसित करने पर जोर दे रही है। डिजिटलाइजेशन और ऑटोमेशन के दौर में कंपनी बड़े औद्योगिक वातावरण में स्टार्टअप जैसी कार्य संस्कृति को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है, ताकि कर्मचारी नए विचारों के साथ बेहतर समाधान विकसित कर सकें।
अधिकारियों के अलावा कंपनी के इंजीनियरिंग इकोसिस्टम को 423 से अधिक गैर-अधिकारी कर्मचारी भी मजबूत कर रहे हैं। ये कर्मचारी माइंस एवं स्मेल्टर्स में महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग प्रक्रियाओं से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं। भारी मशीनरी और जटिल औद्योगिक उपकरणों के संचालन में उनका योगदान कंपनी की परिचालन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
कंपनी की ‘एम्प्लॉयी फर्स्ट’ नीति के तहत कर्मचारियों को विभिन्न स्तरों पर समान अवसर एवं करियर विकास के अवसर उपलब्ध कराने की बात कही गई है। कंपनी के अनुसार महिलाओं को विभिन्न शिफ्टों और महत्वपूर्ण परिचालन भूमिकाओं में अवसर देने के साथ लचीले कार्य घंटे, स्पाउस हायरिंग, बच्चों की देखभाल के लिए एक वर्ष तक का अवकाश तथा मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने वाली नीतियां लागू हैं। इसके अलावा कर्मचारियों को उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार विभिन्न व्यवसायिक कार्यों में भूमिका बदलने के अवसर भी दिए जाते हैं।