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September 15, 2026, 5:17 pm
BIG NEWS : मानसून की बेरुखी से मुश्किल में किसान, आगामी अफीम नीति 2026-27 जारी होने से पहले बढ़ी चिंता, नीमच जिले में अब तक हो चुकी है इतने इंच बारिश, औसत के आंकड़े से अब भी दूर, पढ़े खबर 

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नीमच। मानसून की बेरुखी ने इस बार किसानों की चिंता बढ़ा दी है। आसमान से उम्मीद के मुताबिक पानी नहीं बरसा और जमीन के भीतर भी पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाया। नतीजा यह है कि जिले के कई गांवों में कुएं और बावड़ियां पर्याप्त रूप से रिचार्ज नहीं हो पाई हैं। अब आगामी रबी सीजन में सिंचाई के पानी को लेकर किसानों के सामने मुश्किल खड़ी होती दिखाई दे रही है। सबसे ज्यादा चिंता उन किसानों को है, जो अफीम की खेती पर निर्भर रहते हैं। आगामी अफीम नीति 2026-27 जारी होने से पहले ही किसानों की निगाहें सरकार की ओर टिक गई हैं। कम बारिश के बीच किसान चाहते हैं कि नई नीति में उन्हें राहत मिले, ताकि पानी की कमी और खेती की बढ़ती लागत के बीच उन्हें कुछ सहारा मिल सके।

जिले में इस वर्ष अब तक 25.6 इंच बारिश रिकॉर्ड- 
जिले में इस वर्ष अब तक 25.6 इंच बारिश दर्ज की गई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि तक 43.7 इंच बारिश हो चुकी थी। जिले की औसत वर्षा का आंकड़ा 32.5 इंच है। इस लिहाज से वर्तमान वर्ष में अब तक औसत से 6.9 इंच कम बारिश हुई है। पिछले साल की तुलना करें तो इस बार अब तक 18.1 इंच कम पानी बरसा है। कम बारिश का सीधा असर खेतों के साथ-साथ भूजल स्तर और जलस्रोतों पर भी दिखाई दे रहा है।

कुओं-बावड़ियों में पानी नहीं, अफीम की खेती को लेकर बढ़ी चिंता
ग्राम रेवली-देवली के किसान मोहन नागदा के अनुसार कम बारिश से कुएं-बावड़ियां पर्याप्त रिचार्ज नहीं हो पाई हैं। अफीम की फसल में अधिक पानी की जरूरत होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। जलस्रोतों में पानी की कमी रही तो किसानों को आगामी सीजन में कम पानी वाली फसलों का रुख करना पड़ सकता है। किसानों का कहना है कि बारिश की कमी का सीधा असर सिंचाई व्यवस्था पर पड़ रहा है। जलस्रोतों में पर्याप्त पानी नहीं होने से रबी फसलों की बुवाई और सिंचाई को लेकर भी चिंता बनी हुई है। ऐसे में किसान अब शेष बारिश और आगामी अफीम नीति से राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

अफीम नीति 2026-27 पर टिकी किसानों की निगाहें-
कम बारिश के बीच अफीम किसानों की नजर अब आगामी अफीम नीति 2026-27 पर है। किसानों की मांग है कि नीति में ऐसे प्रावधान किए जाएं, जिससे उन्हें मौजूदा परिस्थितियों में राहत मिल सके। अफीम किसानों की ओर से कट्टे हुए पट्टों को बहाल करने की मांग भी उठाई जा रही है। किसानों का कहना है कि पट्टे बहाल होने से अफीम का रकबा बढ़ सकता है और अधिक किसान इस फसल से जुड़ सकेंगे। इसके साथ ही किसान अफीम का भाव बढ़ाने की मांग भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि बारिश और पानी की स्थिति भी अनिश्चित बनी हुई है। ऐसे में आगामी नीति किसानों के हित में राहत देने वाली होनी चाहिए।

तीनों विकासखंडों में भी बारिश का आंकड़ा कम- 
मंगलवार सुबह 8 बजे तक चालू वर्षा काल में नीमच विकासखंड में 27.5 इंच, जावद विकासखंड में 24.5 इंच और मनासा विकासखंड में 22.0 इंच बारिश दर्ज की गई है। तीनों विकासखंडों में बारिश का असर जलस्रोतों पर दिखाई दे रहा है। किसानों की चिंता सिर्फ वर्तमान फसल तक सीमित नहीं है। आने वाले रबी सीजन में गेहूं, चना सहित अन्य फसलों के लिए भी सिंचाई की जरूरत होगी। ऐसे में पर्याप्त बारिश नहीं होने और कुएं-बावड़ियों के रिचार्ज नहीं होने से किसान अभी से पानी के इंतजाम को लेकर चिंतित हैं।

अब नीति और पानी दोनों से उम्मीद-
बारिश के आंकड़े किसानों की चिंता को और बढ़ा रहे हैं। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार बारिश काफी कम हुई है और औसत से भी जिला पीछे चल रहा है। ऐसे में किसान अब शेष बारिश के साथ-साथ आगामी अफीम नीति 2026-27 से राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं। किसानों की मांग है कि कम बारिश की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए सरकार अफीम नीति में पट्टों की बहाली, अफीम का रकबा बढ़ाने और उचित भाव जैसे मुद्दों पर सकारात्मक निर्णय ले। किसानों का कहना है कि यदि पानी का संकट और नीति से जुड़ी अनिश्चितता दोनों बनी रही तो आने वाला खेती का सीजन उनके लिए और चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

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