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September 14, 2026, 4:49 pm
BIG NEWS : मंदसौर में 8 फीट की अनोखी द्विमुखी गणपति प्रतिमा, आगे पंचमुखी तो पीछे पगड़ीधारी सेठ के रूप में दर्शन देते हैं बप्पा, 1929 में तालाब से मिली थी प्रतिमा, पढ़े रवि पोरवाल की खबर 

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मंदसौर। गणेश चतुर्थी के साथ मंदसौर में 12 दिवसीय विशेष धार्मिक आयोजन शुरू हो गए हैं। गणपति चौक स्थित द्विमुखी चिंताहरण गणपति मंदिर में गणेशोत्सव के दौरान विशेष पूजा-अर्चना, हवन और महाआरती का आयोजन किया जा रहा है। मंदिर में स्थापित करीब 8 फीट ऊंची गणपति प्रतिमा की खासियत यह है कि एक ही शिला पर बनी इस प्रतिमा के आगे और पीछे भगवान गणेश के अलग-अलग स्वरूप के दर्शन होते हैं। प्रतिमा के दोनों ओर श्रद्धालु दर्शन कर सकते हैं।

एक ओर पंचमुखी गणेश, दूसरी तरफ सेठ स्वरूप-
मंदिर समिति ट्रस्ट के उपाध्यक्ष नरेंद्र अग्रवाल ने बताया कि प्रतिमा को उत्तर-दक्षिण दिशा के अनुसार स्थापित किया गया है। उत्तर दिशा की ओर गणपति का पंचमुखी स्वरूप है। इस स्वरूप में पांच सूंड और चार हाथ हैं तथा भगवान गणेश के सिर पर मुकुट सुशोभित है।

वहीं दक्षिण दिशा की ओर गणपति का स्वरूप सेठ जैसा दिखाई देता है। इस ओर भगवान गणेश पगड़ी धारण किए हुए हैं। इसी कारण इस स्वरूप को ‘सेठ गणेश’ के नाम से भी जाना जाता है। दोनों स्वरूपों के दर्शन के लिए गणेशोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है।

1929 में तालाब से मिली थी प्रतिमा-
नरेंद्र अग्रवाल के अनुसार यह प्रतिमा वर्ष 1929 में नाहर सय्यद दरगाह के पास स्थित एक तालाब से मिली थी। उस समय प्रतिमा को नरसिंहपुरा ले जाकर स्थापित करने की योजना बनाई गई थी। प्रतिमा को बैलगाड़ी से ले जाया जा रहा था, लेकिन वर्तमान गणपति चौक के पास पहुंचते ही बैलगाड़ी रुक गई।

काफी प्रयास करने के बावजूद बैलगाड़ी आगे नहीं बढ़ी। इसके बाद प्रतिमा को उसी स्थान पर स्थापित कर दिया गया। बाद में इस स्थान का नाम गणपति चौक पड़ा। मंदिर समिति के अनुसार, तभी से यह स्थान श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

देशभर से पहुंचते हैं श्रद्धालु-
मंदिर समिति के अनुसार द्विमुखी चिंताहरण गणपति की प्रतिमा अपनी तरह की दुर्लभ प्रतिमाओं में मानी जाती है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। समिति का दावा है कि देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालुओं के साथ विदेशी पर्यटक भी यहां दर्शन के लिए पहुंच चुके हैं। श्रद्धालु भगवान गणेश को चिंताहरण स्वरूप में पूजते हैं और अपनी मनोकामनाएं लेकर मंदिर पहुंचते हैं।

12 दिन तक रोज होगी विशेष महाआरती-
गणेश चतुर्थी के अवसर पर मंदिर में 12 दिनों तक विशेष धार्मिक आयोजन किए जाएंगे। इस दौरान प्रतिदिन रात 8 बजे विशेष महाआरती होगी। इसके अलावा हवन, पूजन एवं अन्य धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।

गणेश चतुर्थी के पहले दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। भक्तों ने भगवान गणेश के दोनों स्वरूपों के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और सुख-समृद्धि एवं मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना की।
 

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