दूदरसी। नीमच जिला मुख्यालय के अंतिम छोर पर बसे ग्राम बिसलवास खुर्द में देवकुड़ी के समीप समाधि स्थल पर आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का विश्राम आज, 15 सितंबर मंगलवार को होगा। कथा के दौरान प्रख्यात कथावाचक एवं गौसेवक पंडित कुंदनजी वैष्णव (नाहरगढ़ वाले) ने श्रद्धालुओं को विभिन्न धार्मिक प्रसंगों का रसपान कराया।
कथा के दौरान संत श्री वैष्णव ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से लेकर गोपियों के साथ रासलीला तक के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने ऋषियों द्वारा किए जा रहे यज्ञों में असुरों द्वारा बाधा डालने तथा भगवान श्रीकृष्ण द्वारा असुरों का वध कर संतों की रक्षा किए जाने का प्रसंग भी सुनाया।
कथा में राजा परीक्षित और तक्षक नाग का प्रसंग भी श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र रहा। संत श्री वैष्णव ने बताया कि श्रृंगी ऋषि के श्राप के कारण राजा परीक्षित की सातवें दिन तक्षक नाग के दंश से मृत्यु हुई। राजा परीक्षित अभिमन्यु एवं उत्तरा के पुत्र तथा अर्जुन के पौत्र थे।
राजा परीक्षित की मृत्यु के बाद उनके पुत्र जनमेजय ने पिता की मृत्यु का बदला लेने के लिए नाग यज्ञ कराया, जिसमें अनेक नागों के विनाश का प्रसंग आता है। संत श्री वैष्णव ने इस प्रसंग की विस्तार से व्याख्या करते हुए इसके धार्मिक एवं आध्यात्मिक पक्ष पर प्रकाश डाला।
पूर्णाहुति के बाद होगी महाआरती, महाप्रसादी का आयोजन
कथा के अंतिम दिन मंगलवार को पूर्णाहुति के पश्चात महाआरती का आयोजन होगा। इसके बाद महाप्रसादी का आयोजन किया गया है, जिसमें कथा में उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए भोजन की व्यवस्था रहेगी।
इस सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन देवकुड़ी स्थित समाधि परिवार, बिसलवास खुर्द एवं ग्रामवासियों के सहयोग से किया गया। आयोजन को सफल बनाने के लिए समिति द्वारा आसपास के गांवों में प्रचार-प्रसार कर श्रद्धालुओं को कथा में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया। ग्रामवासियों एवं आयोजन समिति के सामूहिक सहयोग से कथा का आयोजन श्रद्धा एवं भक्ति के वातावरण में संपन्न हो रहा है।