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September 15, 2026, 6:51 pm
KHABAR : कृति संस्था का हिंदी दिवस पर ‘राम कथा में कैकेयी’ विषयक संवाद कार्यक्रम आयोजित, अशोक श्रीवास्तव ने कहा- राम को मर्यादा पुरुषोत्तम बनाने में कैकेयी की भूमिका महत्वपूर्ण, पढ़े खबर 

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नीमच। कृति संस्था द्वारा हिंदी दिवस के अवसर पर ‘राम कथा में कैकेयी’ विषय पर संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह संस्था द्वारा रामकथा के पात्रों हनुमान और भरत पर आयोजित संवाद श्रृंखला की तीसरी कड़ी थी। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता अशोक श्रीवास्तव ‘मानस विद्यार्थी’ ने कहा कि रामचरितमानस केवल कथा नहीं, बल्कि जीवन दर्शन है। रामकथा के कुछ पात्र ऐसे हैं, जिनके बारे में यह तय करना कठिन है कि वे निंदनीय हैं या वंदनीय। इनमें कैकेयी और विभीषण का नाम प्रमुख है। दोनों की भूमिका रामकथा में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

अशोक श्रीवास्तव ने कहा कि कैकेयी अत्यंत रूपवती, बुद्धिमान और युद्धकला में निपुण राजकुमारी थीं। वे केकय नरेश राजा अश्वपति की पुत्री थीं। कैकेयी राम को अपनी संतान की तरह अत्यंत स्नेह करती थीं। उन्होंने विभिन्न रामकथाओं के संदर्भ देते हुए कहा कि दशरथ ने कैकेयी के लिए कनक भवन बनवाया था, जिसे कैकेयी ने सीताजी को उपहार में दे दिया था।

उन्होंने कहा कि राम के वनवास को केवल कैकेयी के कठोर निर्णय के रूप में देखना उचित नहीं है। उनके अनुसार राम ने बाल्यकाल में ही माता कैकेयी से यह वचन लिया था कि वे आवश्यकता पड़ने पर उन्हें इच्छित वरदान देंगी। राम ने यह भी कहा था कि इस वचन के कारण उन्हें लोकनिंदा सहनी पड़ सकती है, उनका सुहाग उजड़ सकता है और भरत भी उनसे विमुख हो सकते हैं। इसके बावजूद कैकेयी ने राम के लिए सब कुछ सहने की बात कही थी।

अशोक श्रीवास्तव ने कहा कि यदि कैकेयी न होतीं तो राम के वनगमन की लीला नहीं होती और राम के पृथ्वी पर अवतार का उद्देश्य भी पूर्ण नहीं हो पाता। राम के वनवास के कारण लक्ष्मण का सेवाभाव, सीता का पति के प्रति समर्पण और भरत का भाई के प्रति अनन्य प्रेम सामने आया। कैकेयी ने राम की प्रसन्नता और लोककल्याण के लिए अपमान का दंश सहा। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि राम अयोध्या लौटने के बाद सबसे पहले माता कैकेयी के भवन में उनसे मिलने गए। कैकेयी के त्याग, समर्पण और भूमिका को एक नए दृष्टिकोण से समझने की आवश्यकता है।

कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के पूजन-अर्चन से हुआ। मुख्य वक्ता अशोक श्रीवास्तव एवं उनके सहयोगी मनीष सेन का स्वागत कृति संस्था के अध्यक्ष ओमप्रकाश चौधरी एवं सचिव रघुनंदन पाराशर ने किया। स्वागत भाषण में अध्यक्ष ओमप्रकाश चौधरी ने कहा कि भक्तिकाल हिंदी साहित्य का स्वर्णकाल माना जाता है और इसमें तुलसीदास की रामचरितमानस का विशेष महत्व है। रामकथा में कैकेयी का योगदान अप्रतिम है।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. अक्षय पुरोहित ने संवाद की भूमिका स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि कैकेयी के कारण ही रामकथा का विस्तार हुआ और पृथ्वी राक्षसों से मुक्त होने की दिशा में आगे बढ़ी।

इस अवसर पर संस्था के पूर्व अध्यक्ष किशोर जेवरिया एवं भरत जाजू ने अशोक श्रीवास्तव को स्मृति चिन्ह प्रदान किया। आभार संस्था के सचिव रघुनंदन पाराशर ने व्यक्त किया। कार्यक्रम में कृति संस्था के सदस्य प्रकाश भट्ट, कमलेश जायसवाल, गणेश खंडेलवाल, सविता चौधरी, कैलाश बाहेती, सत्येंद्र सक्सेना, शरद पाटीदार, नरेंद्र पोरवाल, दर्शनसिंह गांधी, दिनेश मनावत, धर्मेंद्र शर्मा, महेश शर्मा, अनिल डबकरा, रमेश मोरे, दिलीप दुबे, डॉ. महेश शर्मा सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।

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