उज्जैन। खड़े हनुमान मंदिर को लेकर पिछले 15 दिनों से चले आ रहा आंदोलन ने आज बड़ा रूप ले लिया। खड़े हनुमान मंदिर के पास साधु संतों व हिंदूवादी संगठनों का जमावड़ा देखा गया। यहां हजारों की संख्या में कार्यकर्ता व भक्त एकत्रित हुए। अपनी मांगों से संबंधित एक ज्ञापन एसडीएम को सौंपा गया। इसके साथ ही हनुमान चालीसा का पाठ किया गया। शासन प्रशासन को चेतावनी दी गई कि यदि प्रतिमा को हटाया गया तो उग्र आंदोलन होगा जिसकी जिम्मेदारी शासन प्रशासन की ही होगी। खास बात तो यह रही कि ज्ञापन बाबा महाकाल के नाम पर दिया गया।
यहां बता दे की उज्जैन के चमत्कारिक खड़े हनुमान मंदिर इन दोनों देश ही नहीं विदेशों तक चर्चा का केंद्र बना हुआ है। दरअसल यहां सिंहस्थ 2028 के लिए विकास कार्यों के तहत सड़क मार्ग व चौराहा का चौड़ी करण किया जा रहा है । इसी चौड़ीकरण की जद में जो भी धर्मस्थल आ रहा है उन्हें हटाया जा रहा है । इसी क्रम में कई धार्मिक स्थल हटाए जा चुके हैं। जब खड़े हनुमान मंदिर को हटाया जा रहा था तब दीवार व गुंबज व शिखर तो हट गया परंतु प्रतिमा नहीं हट पाई । प्रतिमा हटाने को लेकर पुरातत्व विभाग की टीम व प्रशासन का अमला कई बार प्रयास कर चुका है। इसके पीछे वैज्ञानिक कारण यह बताया जा रहा है कि जिस शीला पर प्रतिमा बनी है इस शिला का करीब 5 फीट हिस्सा जमीन में अन्य शिला के माध्यम से इंटरलॉक है। इसलिए चारों ओर से खुदाई की जाएगी फिर प्रतिमा बाहर निकले।
वही शास्त्र व धर्म के जानकारो व हिंदूवादी संगठन और साधु संतों का कहना है कि यह चमत्कारिक मंदिर है। 200 वर्ष पुरानी यह प्रतिमा है। खुद हनुमान जी यहां से हटाना नहीं चाहते हैं इसलिए यहां प्रतिमा नहीं हटाई जाना चाहिए।
खड़े हनुमान मंदिर के चमत्कार की चर्चा शहर, प्रदेश, देश व अन्य देशों तक पहुंच चुकी है। सनातन को मानने वाले अब इस प्रतिमा को हटाने का विरोध कर रहे है। विरोध के इस क्रम में अलग-अलग प्रकार के प्रयास किया जा रहे हैं । प्रतिदिन यहां धार्मिक आयोजन हो रहे हैं। हस्ताक्षर अभियान चलाया जा रहा है। सुंदरकांड व हनुमान चालीसा का पाठ किया जा रहा है। भंडारा हो रहा है। इसी क्रम में अब तक का सबसे बड़ा आयोजन आज हुआ है। यहां हजारों की संख्या में लोग एकत्रित हुए। साधु संत, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल व अन्य अन्य सामाजिक संगठनों के प्रमुख एकत्रित हुए। हनुमान चालीसा का पाठ किया गया और एसडीएम एल एन गर्ग को ज्ञापन सौंपा गया। खास बात यह रही कि ज्ञापन बाबा महाकाल के नाम था।