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July 8, 2026, 11:42 am
KHABAR : शरीर पर मिट्टी लगाकर नदी किनारे चिता पर लेटे ग्रामीण, केन-बेतवा लिंक परियोजना का विरोध, विस्थापितों को सही मुआवजा देने की मांग, पढे़ खबर 

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छतरपुर। केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगाय, रूंझ, नेगुवा और एनटीपीसी जैसी विकास परियोजनाओं से विस्थापित हुए ग्रामीणों का श्चिता आंदोलनश् पांचवें दिन में प्रवेश कर गया है। जय किसान संगठन के बैनर तले श्न्याय दो या मार दोश् के नारों के साथ यह आंदोलन जारी है। भारी बारिश के बावजूद आदिवासी महिलाएं और पुरुष आंदोलन स्थल पर डटे हुए हैं।


आंदोलन को समर्थन देते हुए सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर ने आमरण अनशन शुरू किया है। प्रभावितों को न्याय दिलाने और भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर उनका अनशन बुधवार को तीसरे दिन में प्रवेश कर गया। आंदोलनकारियों ने आज से श्मिट्टी सत्याग्रहश् भी शुरू कर दिया है।


अमित भटनागर ने प्रशासन पर प्रभावितों को डराने और धमकाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि- जब तक वास्तविक प्रभावितों को उनका हक नहीं मिलता और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा। 


प्रशासन के अधिकारी आंदोलन स्थल पर पहुंचे, जहां उनकी आंदोलनकारियों से बहस हुई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने उन्हें डराने की कोशिश की। उनका यह भी आरोप है कि सरकारी कार्यालयों में रिश्वत मांगी जाती है और उनकी आवाज दबाने के लिए प्रशासनिक तंत्र का दुरुपयोग किया जा रहा है।


भ्रष्ट अधिकारियों पर कार्रवाई करने की मांग
आंदोलनकारियों ने सरकार और जिला प्रशासन के समक्ष अपनी प्रमुख मांगें रखी हैं कि सभी विस्थापित परिवारों को उनकी भूमि और घर का उचित मुआवजा और पुनर्वास दिया जाए। विभिन्न परियोजनाओं में हुए कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच हो।


भ्रष्टाचार के दोषी अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। विस्थापितों को डराने-धमकाने का सिलसिला तुरंत रोका जाए।


अमित बोले- 4 साल से बात कर रहे, समाधान नहीं हुआ
अमिट भटनागर का एक वीडियो सामने आया है। इसमें वह कह रहे हैं कि छतरपुर-पन्ना जिले की परियोजनाएं किसानों के जल-जंगल-जमीन अधिग्रहित तो कर रही हैं लेकिन भू-अर्जन 2013 व अन्य कानूनों का पालन नहीं किया जा रहा। पिछले 4 सालों से हम बात कर रहे हैं लेकिन समाधान नहीं हुआ। प्रशासन अब लोगों के साथ अत्याचार पर उतारू हो चुका है।


हमारे पिछले चिता आंदोलन को देश भर का समर्थन मिला था। प्रशासन ने हमसे कई झूठे वादे किए। आंदोलन का दमन करने के करीब 250 लोगों पर फर्जी केस लगा दिए। अभी लोगों को बिना मुआवजा दिए मकान गिरा दिए हैं।


यह करना सुप्रीम कोर्ट के नियम का उल्लंघन है। किसानों के मकानों के साथ जमीनें भी अधिगृहित की जा रही हैं, वो भी बिना किसी मुआवजा दिए। हम यहां आंदोलन कर रहे हैं तो लोगों को दबाया जा रहा है, उन्हें आवाज नहीं उठाने दी जा रही। उन पर प्रशासन अत्याचार कर रहा है।

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