भोपाल। मध्य प्रदेश में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन और हड़ताल कर रहे पटवारियों के खिलाफ राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रदेश के आठ से नौ जिलों में परिवीक्षा अवधि में कार्यरत 27 नव नियुक्त पटवारियों की सेवाएं समाप्त की जा चुकी हैं। वहीं, 75 नियमित पटवारियों को निलंबित करने और हजारों पटवारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने की कार्रवाई भी सामने आई है।
परिवीक्षा अवधि वाले पटवारियों पर कार्रवाई
वर्ष 2023-24 के दौरान प्रदेश में करीब 6 हजार नए पटवारियों की नियुक्ति की गई थी। ये पटवारी तीन साल की परिवीक्षा अवधि में कार्यरत हैं। आरोप है कि हड़ताल और कार्य बहिष्कार के दौरान कुछ पटवारियों ने सरकारी निर्देशों का पालन नहीं किया, जिसके बाद जिला स्तर पर कार्रवाई की गई।
नव नियुक्त पटवारियों की सेवाएं समाप्त किए जाने से राजस्व विभाग के कर्मचारियों में हलचल है। हालांकि, कार्रवाई से प्रभावित पटवारियों के मामलों में संबंधित आदेशों और सेवा समाप्ति के कारणों की अलग-अलग पुष्टि जरूरी है।
नियमित पटवारियों पर भी प्रशासनिक शिकंजा
नव नियुक्त पटवारियों के अलावा नियमित पटवारियों के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई है। जानकारी के मुताबिक, अब तक 75 नियमित पटवारियों को निलंबित किया गया है, जबकि बड़ी संख्या में कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। प्रशासनिक कार्रवाई का उद्देश्य सरकारी कामकाज और राजस्व संबंधी सेवाओं को प्रभावित होने से रोकना बताया जा रहा है।
कई पटवारियों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति
प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुछ मामलों में पटवारियों के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति भी दी गई है। इनमें संतोष सतनामी (सतना), सनी द्विवेदी (जबलपुर), देवेंद्र सहारिया (नर्मदापुरम), धर्मेंद्र सिंह राठौर (सीहोर) और मंगलेश खंडेलवाल (भोपाल) के नाम शामिल बताए गए हैं।
राजस्व कामकाज पर असर
पटवारियों के आंदोलन और प्रशासन की कार्रवाई के बीच राजस्व विभाग के मैदानी कामकाज पर असर पड़ने की आशंका है। नामांतरण, सीमांकन, गिरदावरी और अन्य राजस्व संबंधी कार्यों के लिए आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
फिलहाल, कार्रवाई का पूरा दायरा, संबंधित जिलों के आदेश और कर्मचारियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।