शाजापुर। दिव्यांग बेटे को पूजा-पाठ के जरिए ठीक करने का झांसा देकर 75 वर्षीय बुजुर्ग से 4 लाख रुपए की ठगी करने के मामले में शुजालपुर मंडी पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से ठगी की राशि में से 2 लाख 75 हजार रुपए नकद और वारदात में प्रयुक्त 8 लाख रुपए कीमत की टीयूवी कार जब्त की है। जब्त मशरूका की कुल कीमत 10 लाख 75 हजार रुपए बताई गई है।
महिला ने दिया पूजा-पाठ से ठीक करने का झांसा
पुलिस के अनुसार, 19 सितंबर 2026 को फरियादी विजय बामनिया (75), निवासी देहण्डी ने शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि 11 सितंबर को उनके घर एक साड़ी बेचने वाली महिला आई थी। महिला ने अपना नाम रानी बताया और उनके दिव्यांग बेटे को देखकर कहा कि वह एक गुरुजी को जानती है, जो पूजा-पाठ से उनके बेटे को ठीक कर सकते हैं। इसके लिए 4 लाख रुपए खर्च होने की बात कही गई।
आरोप है कि महिला, उसके पति और सुदामा गुरुजी ने मिलकर दिव्यांग बेटे को ठीक करने के नाम पर बुजुर्ग से 4 लाख रुपए ले लिए। शिकायत की जांच के बाद थाना शुजालपुर मंडी में अपराध क्रमांक 372/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) में प्रकरण दर्ज कर विवेचना शुरू की गई।
साइबर सेल की मदद से पकड़े गए आरोपी
पुलिस अधीक्षक प्रियंका शुक्ला, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महेंद्र तारणेकर के निर्देशन और अनुविभागीय अधिकारी पुलिस निमेष देशमुख के मार्गदर्शन में आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम गठित की गई। टीम ने साइबर सेल की मदद से मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और मुखबिर सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रामनिवास गौंड उर्फ सुदामा, कैया गौंड और उसकी पत्नी बुलई उर्फ रानी, निवासी शाहगढ़, जिला सागर के रूप में हुई है।
नकदी और वारदात में प्रयुक्त कार जब्त
पुलिस ने आरोपियों से ठगी की राशि में से 2 लाख 75 हजार रुपए नकद बरामद किए। इसके अलावा वारदात में प्रयुक्त टीयूवी कार क्रमांक एमपी 15 सीबी 7180 भी जब्त की गई, जिसकी कीमत करीब 8 लाख रुपए बताई गई है। इस तरह पुलिस ने कुल 10 लाख 75 हजार रुपए का मशरूका जब्त किया है।
पुलिस टीम की रही सराहनीय भूमिका
इस कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक शिवकुमार यादव, उपनिरीक्षक तेजप्रकाश बोहरे, प्रधान आरक्षक रंजीत भानेरिया, सचिन सिसोदिया, बलराम यादव, आरक्षक संजय परमार, संदीप यादव, रविकांत यादव और साइबर सेल के आरक्षक घनश्याम राजपूत की सराहनीय भूमिका रही।