नीमच। नगर पालिका नीमच में पदस्थ लेखापाल जमनालाल पाटीदार पर सिविल सेवा नियमों के उल्लंघन का आरोप लगा है। इस मामले की शिकायत कलेक्टर दिनेश जैन तक भी पहुंची है। शिकायत में मय दस्तावेजों के साथ लेखापाल पर आरोप लगाते हुए बताया गया है कि वे तीन संतानों के पिता है और इस सच को छुपाने के लिए उन्होंने समग्र आईडी से बड़ी बेटी का नाम हटवा दिया है। यह काम उन्होंने जीरन नगर परिषद के प्रभारी सीएमओ रहते हुए किया है। इसके अलावा भी पाटीदार पर कई तरह के भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। लेखापाल जमनालाल पर एफआईआर दर्ज कराने की मांग भी उठने लगी है।
विनोद कुमार ने मय दस्तवेजों के साथ की शिकायत-
आपकों बता दें कि विनोद कुमार नाम के व्यक्ति ने 28 मार्च 2023 को मय दस्तावेज के कलेक्टर दिनेश जैन को लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत में विनोद कुमार ने बताया कि मप्र सिविल सेवा अधिनियम 1961 के अनुसार नियम है कि 26 जनवरी 2001 के बाद अगर किसी शासकीय सेवक के तीसरी संतान होती है, तो वह नौकरी के लिए पात्र नहीं रहेगा।
हाईकोर्ट ग्वालियर ने भी ठहराया था उचित-
सरकार के इस नियम को हाईकोर्ट ग्वालियर ने भी उचित ठहराया था और अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि यह निर्णय मप्र के सभी शासकीय सेवकों पर लागू होगा, लेकिन नीमच की नगर पालिका में पदस्थ लेखापाल जमनालाल पिता बद्रीलाल पाटीदार ने सिविल सेवा अधिनियम व हाईकोर्ट के आदेश का उल्लंघन किया है। उनकी तीन संतानें है, जिसमें दो पुत्री व एक पुत्र शामिल है। इसमें खास बात यह है कि जमनालाल के तीनों बच्चों का जन्म वर्ष 2001 के बाद हुआ है।
2020 में पद का दुरूपयोग कर हटाया बड़ी बेटी का नाम-
शिकायतकर्ता विनोद कुमार के अनुसार जमनालाल पाटीदार की तीन संतानें हैं। उनकी पत्नी निर्मला पाटीदार ने 2003 में बड़ी बेटी किरण, 2008 में दूसरी बेटी दिव्यांशी और 2015 में पुत्र लक्ष्य को जन्म दिया था। इसके बाद यह मामला न उठे इसीलिए जमनालाल ने 2020 में नगर परिषद जीरन के प्रभारी सीएमओ रहते हुए अपने पद का दुरूपयोग किया और समग्र परिवार आईडी के रिकार्ड से बड़ी बेटी किरण का नाम हटवा दिया और पिता बद्रीलाल की समग्र आईडी में बेटी का नाम जुड़वा दिया। इसके बाद जमनालाल के समग्र परिवार आईडी रिकार्ड में महज 2 बच्चे ही रह गए।
आय से अधिक संपत्ति का भी लगा आरोप-
शिकायकर्ता विनोद कुमार ने अपनी शिकात में लेखापाल जमनालाल पाटीदार पर सिविल सेवा नियमों का उल्लंघन करते हुए शासकीय दस्तावेजों में हेरफेर करने सहित कई अन्य आरोप भी लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार जमनालाल पाटीदार ने नगर परिषद् जीरन में पदस्थ रहते हुए कई घपले व घोटाले किए हैं। इन घपले व घोटालों से पाटीदार ने आय से अधिक संपत्ति अर्जित की है। ऐसे में जमनालाल पाटीदार, उसकी पत्नी निर्मला पाटीदार सहित परिवार के अन्य सदस्यों की संपत्ति की जांच होनी चाहिए।
भृत्य पद पर हुई थी नियुक्ति, बन गया लेखापाल-
शिकायतकर्ता विनोद कुमार ने बताया कि जमनालाल पाटीदार की 2005 में नगर परिषद जीरन में भृत्य के पद पर नियुक्ति हुई थी। इसके बाद महज 7 सालों में ही 2012 में वह सांठगांठ कर लेखापाल के पद पर पदोन्न्त हो गया। इन सभी आरोपों को लेकर जब वॉईस ऑफ एमपी ने लेखापाल जमनालाल पाटीदार के फोन नं. 94066-12411 पर संपर्क करने की कोशिश की तो फोन बंद मिला।
उधर सोशल मीडिया पर भी जमकर लगे आरोप-
नीमच नगर पालिका में लेखापाल के पद पर पदस्थ जमनालाल पाटीदार पर भ्रष्टाचार व अन्य तरह के आरोप लगने के समाचारों से संबंधित अखबारों की कटिंग जैसे ही सोशल मीडिया पर पोस्ट हुई तो आरोपों की झड़ी लग गई। सोशल मीडिया के माध्यम से पोस्ट पर टिप्पणी करते हुए लोगों ने लेखापाल को जमकर घेरा और कई तरह के आरोप भी लगाए। साथ ही ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज कराने सहित कठोर से कठोर कार्रवाई की मांग भी की।
नपाध्यक्ष चौपड़ा व सीएमओ वशिष्ठ का मिला संरक्षण-
कांग्रेस पार्षद योगेश प्रजापति ने बताया कि नगर पालिका नीमच में नपाध्यक्ष व सीएमओ की मिलीभगत से कमिशन का खेल हो रहा है। इसी खेल के लिए नपाध्यक्ष ने जमनालाल पाटीदार को लेखापाल के पद पर नियुक्त किया है। लेखापाल पर कई संगीन आरोप लगे हैं। उनकी तीन संतानों की जानकारी होने के बाद भी जिम्मेदारों ने उन पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है। लेखापाल जमनालाल ने नगर पालिका अधिनियम व सिविल सेवा के नियमों का मजाक उड़ाकर रख दिया है। नपा के जिम्मेदारों को तत्काल ऐसे व्यक्ति को बर्खास्त करना चाहिए। लेखापाल पर आय से अधिक संपत्ति के भी आरोप लगे हैं। इसकी भी जांच होनी चाहिए।
नपा की स्थिति अंधेर नगरी चौपट राजा जैसी-
कांग्रेस के पूर्व पार्षद मोनू लोक्स ने कहा कि नीमच नगर पालिका सुर्खियों में बनी हुई है। जमीनों की बंदरबाट के बाद अब नपा के लेखापाल जमनालाल पर बड़ा आरोप लगा है। जमनालाल ने दस्तावेजों में हेराफेरी कर न्यायालय को चुनौती है। कलेक्टर साहब को तत्काल एक्शन लेते हुए ऐसे अधिकारियों पर कार्रवाई करनी चाहिए है। भाजपा के बोर्ड में नपा की स्थिति अंधेर नगरी चौपट राजा जैसी हो गई है। कार्यालय से दिनभर अधिकारी नदारद रहते हैं। नपाध्यक्ष स्वाति चौपड़ा भी खानापूर्ति के लिए दफ्तर आती है और चली जाती है।