मुरैना। जिले भर में यात्री वाहन में लोग जान का जोखिम उठाकर सफर कर रहे हैं। हाइवे पर चलने वाले वाहनों में चालक और परचालक सीट से दोगुनी संख्या में यात्री बैठाते हैं ज्यादा मुनाफा कमाने के लालच में यात्रियों की जिंदगी को खतरे में डालकर गेट और खिड़की में सवारी को लटका लेते हैं हाइवे पर यह ओवरलोड वाहन अनियंत्रित स्पीड में फर्राटे भरते हैं, जिससे आए दिन हादसे हो रहे हैं।
आपको बता दें, कि प्रदेश भर में ओवरलोडेड वाहनों से कई हादसे हो चुके हैं, लेकिन उसके बाद शासन और प्रशासन इन ओवरलोडेड वाहनों के खिलाफ हादसे होने के एक-दो दिन बाद कार्रवाई करता है। फिर वह कार्रवाई भी ठंडे बस्ते में डाल दी जाती है। यही वजह है कि फिर से सड़कों पर यात्री वाहन क्षमता से दोगुनी सवारी भरकर ले जा रहे हैं। ऐसा सिर्फ बस चालक ही नहीं कर रहे हैं बल्कि टमटम से लेकर के पिकअप और स्कूली वेन में भी यही हालात हैं। जिसकी पड़ताल कर रहे निकली विस्तार न्यूज़ की टीम ने जोरा रोड से लेकर के कैलारस सबलगढ़ और अंबाह पोरसा मैं जमीनी हकीकत जानी तो स्थिति डरावनी थी। जी यात्री बस की क्षमता 30 सवारी ले जाने की है उसमें 100 से 120 सवारी भरी हुई थी। बस चालक के द्वारा पहले तो बस को अंदर से खचाखच भर लिया जाता है फिर ऊपर छत पर लोगों को बिठा दिया जाता है इसके बाद बचेकुचे यात्री गेट से लटक जाते हैं। या तो सिर्फ बेसन की बात है जो पतिदिन अपने परमिट पर चलती हैं, अब अगर स्कूली वेन और डिग्गामार वाहनों की बात की जाए तो उनकी चो पर भी लोग बैठकर सफर कर रहे हैं जिसके चलते कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। लेकिन जिम्मेदार है वह कार्यवाही करने से बचते हुए नजर आ रहे हैं। उधर आरटीओ की बात की जाए तो वह सिर्फ इन दोनों प्राइवेट स्कूलों को निशाना बनाए हुए हैं उसके अलावा उन्हें कुछ नजर नहीं आ रहा है जिसके चलते अब आरटीओ की कार्य प्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर एक ही और निशान क्यों बने हुए हैं क्या सड़कों पर यात्री वाहन नजर नहीं आ रहे हैं।