सिंगरौली। जिले के चितरंगी तहसील के ग्राम भुईधरवा में वन विभाग की कार्रवाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से जिस जमीन पर वे रह रहे थे, वहां बने उनके आशियानों को वन विभाग ने तोड़ दिया। कार्रवाई के विरोध में करीब 25 से 30 परिवारों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है।
ग्रामीणों का कहना है कि वे वर्ष 1969 से इस जमीन पर काबिज हैं और उनके परिवार पीढ़ियों से यहां खेती करते आ रहे हैं। उनका दावा है कि इसी जमीन पर सरकार की ओर से प्रधानमंत्री आवास बनाए गए, बिजली कनेक्शन दिए गए और हैंडपंप भी लगाए गए हैं। इसके बावजूद वन विभाग ने जमीन को अवैध बताकर कार्रवाई कर दी।
ग्रामीणों ने वन विभाग के बीट गार्ड पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पट्टा दिलाने के नाम पर उनसे 40 हजार रुपए और एक बकरा रिश्वत के रूप में लिया गया। हालांकि अब विभाग की ओर से पट्टा देने के बजाय बेदखली की कार्रवाई की जा रही है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि 18 जुलाई तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे चितरंगी तहसील कार्यालय के सामने धरना प्रदर्शन करेंगे।
मामला सामने आने के बाद प्रशासन सक्रिय हुआ है। अपर कलेक्टर ने ग्रामीणों की शिकायत पर राजस्व और वन विभाग की संयुक्त कार्रवाई को फिलहाल रोक दिया है। साथ ही पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने कहा है कि जांच के आधार पर पात्र भूमिहीन परिवारों को पट्टा दिलाने की प्रक्रिया की जाएगी। वहीं, जिन मकानों को नुकसान पहुंचा है, उनके पुनर्वास और राहत व्यवस्था का भरोसा भी दिया गया है।