उज्जैन। गुरुवार को शहर में भगवान जगन्नाथ की दो रथ यात्राएं निकाली जाएंगी। पहली रथ यात्रा इस्कॉन मंदिर की ओर से इंदिरा नगर चौराहे से और दूसरी कार्तिक चौक स्थित भगवान जगदीश मंदिर से खाती समाज की ओर से निकलेगी। दोनों यात्राएं दोपहर 2 बजे शुरू होकर अलग-अलग मार्गों से शहर का भ्रमण करने के बाद वापस अपने-अपने मंदिर पहुंचेंगी।
इस्कॉन की यात्रा में पहली बार तीन रथ शामिल होंगे
इस्कॉन मंदिर के पीआरओ राघव पंडित दास प्रभु ने बताया कि यात्रा में भगवान जगन्नाथ, भगवान बलदेव और देवी सुभद्रा अलग-अलग रथों पर विराजमान होकर नगर भ्रमण करेंगे। पहली बार यात्रा में तीन पारंपरिक रथ शामिल किए जा रहे हैं।
भगवान बलदेव तालध्वज, देवी सुभद्रा दर्पदलन और भगवान जगन्नाथ नंदीघोष रथ पर विराजमान रहेंगे। इनमें भगवान जगन्नाथ का नंदीघोष रथ सबसे बड़ा होगा, जिसकी ऊंचाई करीब 35 फीट है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान के रथ खींचते हुए यात्रा में शामिल होंगे।
ढाई लाख की विशेष पोशाक पहनेंगे भगवान
भगवान के लिए बंगाल के कारीगरों ने जापान से मंगाए गए धागों और मोतियों से करीब ढाई लाख रुपये की लागत से विशेष पोशाक तैयार की है। इसी के साथ यात्रा के लिए तीन विशेष रथ भी तैयार किए गए हैं।
यात्रा इंदिरा नगर चौराहे से शुरू होकर मंडी चौराहा, चामुंडा माता, फ्रीगंज ब्रिज, टॉवर चौक, तीन बत्ती और विक्रमादित्य शोध पीठ होते हुए वापस मंदिर पहुंचेगी।
100 साल पुराने रथ पर निकलेगी खाती समाज की यात्रा
कार्तिक चौक स्थित भगवान जगदीश मंदिर से खाती समाज की रथ यात्रा भी दोपहर 2 बजे शुरू होगी। यात्रा से पहले भगवान जगदीश का अभिषेक, पूजन और महाआरती होगी। इसके बाद भगवान के विग्रह को रथ में विराजमान कराया जाएगा।
इस यात्रा में करीब 1200 गांवों के श्रद्धालु शामिल होंगे। श्रद्धालु करीब 100 साल पुराने लकड़ी के रथ को अपने हाथों से खींचेंगे। यात्रा में बड़ी संख्या में महिला, पुरुष और बच्चे भी शामिल होंगे।
रथ यात्रा कार्तिक चौक से शुरू होकर गणगौर दरवाजा, मोड़ की धर्मशाला, दानी गेट, ढाबा रोड, गोपाल मंदिर, गुदरी चौराहा और पानदरीबा होते हुए वापस कार्तिक चौक स्थित मंदिर पहुंचेगी।