उज्जैन। आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा से बुधवार से गुप्त नवरात्र की शुरुआत हो गई है। इस बार गुप्त नवरात्र पुष्य नक्षत्र, हर्षल योग और गजकेसरी योग जैसे शुभ संयोगों में प्रारंभ होने से इसका धार्मिक महत्व और बढ़ गया है। नौ दिनों तक उज्जैन, नलखेड़ा और दतिया में तांत्रिक साधकों और श्रद्धालुओं का विशेष जमावड़ा रहेगा।
उज्जैन के चक्रतीर्थ एवं ओखलेश्वर श्मशान, विक्रांत भैरव मंदिर, गढ़कालिका, हरसिद्धि मंदिर और महाकाल क्षेत्र, नलखेड़ा के मां बगलामुखी मंदिर तथा दतिया के मां पीतांबरा पीठ में देशभर से साधक तंत्र साधना के लिए पहुंचेंगे। वहीं हरसिद्धि मंदिर सहित प्रमुख शक्तिपीठों में श्रद्धालुओं की भीड़ भी रहेगी।
ज्योतिषाचार्य पंडित अमर डिब्बेवाला के अनुसार वर्ष में चार नवरात्र होते हैं, जिनमें आषाढ़ और माघ के नवरात्र गुप्त नवरात्र कहलाते हैं। यह साधना, उपासना और गुप्त विद्याओं की सिद्धि के लिए विशेष माने जाते हैं। इस दौरान दो सर्वार्थ सिद्धि योग और तीन रवि योग बन रहे हैं, जिन्हें शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए भी अनुकूल माना जाता है। गुप्त नवरात्र का समापन 22 जुलाई को भड्डली नवमी के साथ होगा।
तांत्रिक परंपरा के अनुसार अघोर साधक मध्यरात्रि 12 बजे से सुबह 4 बजे तक श्मशानों में विशेष तंत्र साधना करेंगे, जबकि सामान्य श्रद्धालु दुर्गा सप्तशती, दुर्गा कवच और देवी मंत्रों के पाठ के माध्यम से माता की आराधना कर सकते हैं। उज्जैन को शिव-शक्ति की संयुक्त उपस्थिति के कारण तंत्र साधना और सिद्धि प्राप्ति का प्रमुख केंद्र माना जाता है।