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August 5, 2025, 4:45 pm
BIG NEWS : नीमच के युवा कलाकार राहुल लोहार की अनूठी कलाकृति ने बटोरी सराहना, 2x2 मिमी के टूटे रुद्राक्ष पर बनाई भगवान पशुपतिनाथ की अद्वितीय छवि, मंदसौर कलेक्टर ने की सराहना, पढ़े रवि पोरवाल की खबर 

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मंदसौर। कला, श्रद्धा और नवाचार का दुर्लभ संगम पेश किया है नीमच जिले के कुचड़ोद गांव के युवा कलाकार राहुल लोहार ने। उन्होंने महज 2x2 मिलीमीटर के टूटे हुए रुद्राक्ष के आधे हिस्से पर भगवान पशुपतिनाथ की अद्भुत और सूक्ष्म चित्रकारी कर सबको चौंका दिया है। यह चित्र साधारण आंखों से नहीं, बल्कि बिल्लोरी कांच (मैग्निफाइंग ग्लास) से देखने पर पूरी भव्यता के साथ दिखाई देता है।

देशी रंगों से बनी दिव्य छवि-
राहुल ने इस चित्र में किसी भी महंगे या कृत्रिम रंग का उपयोग नहीं किया। उन्होंने गेरू, सफेदा और देसी गोंद जैसे पारंपरिक रंगों से चित्र को उकेरा, जो उनकी कला और संस्कृति के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। बिना किसी आधुनिक ब्रश या तकनीकी उपकरण के, उन्होंने मात्र तीन घंटे की अथक मेहनत में यह चित्र तैयार किया।

खंडित रुद्राक्ष बना प्रेरणा का माध्यम-
राहुल ने बताया कि यह विचार उन्हें तब आया जब उन्होंने घर में एक टूटा हुआ रुद्राक्ष देखा, जिसे पहले नदी में प्रवाहित करने का सोचा गया था। लेकिन बाद में उन्होंने इस खंडित रुद्राक्ष पर मंदसौर के प्रसिद्ध भगवान पशुपतिनाथ की सूक्ष्म छवि बनाने का निश्चय किया। आज यह कलाकृति दर्शाती है कि भक्ति और सृजनात्मकता के मेल से किसी भी वस्तु को अनुपम सौंदर्य में बदला जा सकता है।

आंखों से नहीं, भावनाओं से देखने योग्य कला-
यह सूक्ष्म चित्र इतनी बारीकी से बनाई गई है कि नंगी आंखों से देखना कठिन है, लेकिन मैग्निफाइंग ग्लास से देखने पर भगवान पशुपतिनाथ की मूर्ति की हर रेखा, भाव और रंग स्पष्ट नजर आते हैं। यह कलाकृति दर्शाती है कि कला केवल दृष्टि से नहीं, बल्कि संवेदना से भी अनुभव की जाती है।

प्रशासन ने भी की सराहना- 
मंदसौर कलेक्टर अदिति गर्ग ने राहुल की इस अनूठी कृति की प्रशंसा करते हुए कहा कि इतने छोटे रुद्राक्ष पर भगवान पशुपतिनाथ की छवि उकेरना न केवल असाधारण कलात्मक कौशल का परिचायक है, बल्कि यह कला और आस्था के अद्भुत संगम को भी दर्शाता है। राहुल जैसे युवा कलाकार हमारे जिले की सांस्कृतिक पहचान को और ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं।

परंपरा में पले-बढ़े कलाकार की प्रेरणादायक यात्रा
राहुल लोहार का जन्म एक सामान्य ग्रामीण परिवार में हुआ। उनके माता-पिता देवीलाल लोहार एवं शांति बाई लोहार ने उन्हें संस्कार, अनुशासन और सेवा जैसे मजबूत मूल्यों के साथ पाला। बचपन से ही राहुल में सामाजिक चेतना और कला के प्रति रुचि का अनूठा समन्वय देखने को मिला। समय के साथ राहुल ने अपनी रुचियों को एक बहुआयामी पहचान दी। उनकी कलाकृतियाँ न केवल स्थानीय संस्कृति की गहराई को उजागर करती हैं, बल्कि उनमें वैश्विक स्तर की संवेदनशीलता भी देखने को मिलती है। उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों से भी सम्मान प्राप्त हो चुका है।

ग्रामीण युवाओं के लिए आदर्श बना एक कलाकार-
आज राहुल लोहार सिर्फ एक कलाकार नहीं, बल्कि एक प्रेरणास्रोत हैं। वह रचनात्मकता को विवेक के साथ और स्थानीय मूल्यों को वैश्विक सोच के साथ जोड़ने वाले युवा नेता के रूप में उभर रहे हैं। चाहे वह उनकी चित्रकारी हो, सामाजिक अभियान हों या नेतृत्व कार्यक्रम हर कार्य में उनकी सोच स्पष्ट है सृजन से परिवर्तन लाना, परंपरा को बचाना और समाज को आगे बढ़ाना। ग्रामीण भारत के हजारों युवाओं के लिए राहुल की यह यात्रा एक स्पष्ट संदेश देती है कि यदि दृष्टि सच्ची, प्रयास निरंतर और मन साफ हो, तो कोई भी बाधा व्यक्ति को सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचने से नहीं रोक सकती।

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