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October 13, 2026, 3:39 pm
BIG NEWS : बिजली कटौती पर किसान संघ का सरकार को अल्टीमेटम, दशहरे तक समस्याएं नहीं सुलझाईं तो सड़कों पर उतरेंगे, बोले- गांवों में रात 10ः30 बजे काट रहे बिजली, पढे़ खबर 

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भोपाल। मध्यप्रदेश में बिजली कटौती, खाद-बीज की कमी, सूखे जैसे हालात और फसलों की खरीदी को लेकर भारतीय किसान संघ ने सरकार को दशहरे तक का अल्टीमेटम दिया है। संघ के प्रदेशाध्यक्ष कमल सिंह आंजना ने मंगलवार को भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि सरकार किसानों की समस्याओं का जल्द निराकरण करे, नहीं तो संघ बड़ा आंदोलन करेगा। उन्होंने कहा कि संघ बातचीत के जरिए समस्याओं का समाधान चाहता है, लेकिन मुख्यमंत्री से चर्चा के लिए लगातार संपर्क करने के बावजूद अब तक जवाब नहीं मिला है।

दशहरे तक समस्याएं सुलझाने का समय
आंजना ने कहा कि दीपावली नजदीक है, लेकिन किसान बिजली, पानी, खाद और बीज के लिए परेशान हैं। गांवों में अघोषित बिजली कटौती हो रही है। रात 10ः30 बजे बिजली काट दी जाती है, जबकि यह लोगों के सोने का समय होता है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में बुजुर्गों और परिवारों को परेशानी हो रही है। बिजली कटौती का मुद्दा कैबिनेट में मंत्री भी उठा चुके हैं, लेकिन हालात नहीं सुधरे।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री से वार्ता के लिए लगातार संपर्क किया जा रहा है, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला। संभव है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद मुख्यमंत्री या प्रशासन किसानों को चर्चा के लिए बुलाए। संघ बातचीत से समाधान चाहता है। सरकार को दशहरे तक का समय दिया जा रहा है। इसके बाद आंदोलन किया जाएगा। आंजना ने दावा किया कि आंदोलन में आम जनता भी किसानों का साथ देगी।

किसान जो मांगेंगे, संघ उसका समर्थन करेगा
आंजना ने कहा कि किसान की आवाज ही भारतीय किसान संघ की आवाज है। किसान जो मांग करेगा, संघ उसी का समर्थन करेगा। किसानों की मांग है कि जिन फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) घोषित है, उनकी खरीदी उसी दर पर हो। उन्होंने सवाल किया कि जब सरकार समर्थन मूल्य घोषित कर चुकी है, तो भावांतर योजना की जरूरत क्यों पड़ रही है। उनके मुताबिक, भावांतर की व्यवस्था केवल उन फसलों के लिए होनी चाहिए, जिनका समर्थन मूल्य घोषित नहीं है।

उन्होंने सोयाबीन और धान की खरीदी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार भावांतर देने की बात कर रही है, लेकिन यह स्पष्ट होना चाहिए कि किसानों को इसका लाभ कैसे मिलेगा। धान के मामले में भावांतर की व्यवस्था कैसे लागू होगी, यह भी चिंता का विषय है।

आंजना ने कहा कि भावांतर का भुगतान मंडियों के माध्यम से किया जाता है, लेकिन कई जिलों और तहसीलों में मंडियां ठीक से संचालित नहीं हो रही हैं। कुछ जगह मंडियां बनी हैं, लेकिन वहां नीलामी नहीं होती। शहरों में ही नीलामी होने से किसानों को उपज बेचने में परेशानी होती है। सरकार खरीदी व्यवस्था को सुचारू करे, ताकि किसानों को उपज का उचित दाम मिल सके।

20 से 22 जिलों में सूखे जैसे हालात
किसान संघ के प्रदेशाध्यक्ष ने दावा किया कि प्रदेश के 20 से 22 जिलों में सूखे जैसी स्थिति है। कई क्षेत्रों में नदी-नाले खाली हैं। आने वाले दिनों में पीने के पानी का संकट भी खड़ा हो सकता है। जिन क्षेत्रों में सूखे के हालात हैं, वहां कुछ किसानों के पास फसल के लिए केवल 10 से 15 दिन का पानी बचा है।

आंजना ने सवाल उठाया कि सिंचाई के लिए बिजली और पानी नहीं मिलेगा, तो किसान फसल कैसे उगाएगा। उन्होंने कहा कि खेती के लिए समय पर पानी मिलना जरूरी है। जहां सिंचाई की सुविधा सीमित है, वहां सरकार कम पानी में तैयार होने वाली फसलों को बढ़ावा दे और किसानों को उपयुक्त बीज उपलब्ध कराए। उन्होंने नर्मदा का पानी नहरों और नदियों के माध्यम से खेतों तक पहुंचाने की मांग भी की।

रात 10ः30 बजे काट रहे बिजली
आंजना ने कहा कि गांवों में सिंचाई के साथ घरेलू बिजली आपूर्ति भी नियमित नहीं है। मेंटेनेंस के नाम पर रात में दो से चार घंटे तक बिजली गायब रहती है। रात 10रू30 बजे, जब लोग सोने की तैयारी करते हैं, उसी समय बिजली काट दी जाती है। इससे गांवों में बुजुर्गों और परिवारों को परेशानी होती है।

मंत्रियों द्वारा कैबिनेट बैठक में बिजली कटौती का मुद्दा उठाए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि जब यह समस्या सरकार के स्तर पर भी सामने आ चुकी है, तो ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति सुधरनी चाहिए। बिजली नहीं मिलने से किसान सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। सूखे जैसे हालात वाले क्षेत्रों में परेशानी और बढ़ गई है। संघ ने घरेलू और कृषि, दोनों तरह की बिजली आपूर्ति नियमित करने की मांग की।

टोकन के बावजूद किसानों को खाद नहीं मिल रही
आंजना ने खाद वितरण व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि टोकन के नाम पर प्रशासनिक प्रक्रिया चल रही है, लेकिन किसानों को खाद नहीं मिल पा रही है। उनके मुताबिक, अधिकारी और कर्मचारी व्यवस्था बनाने में लगे हैं, फिर भी किसानों को खाद के लिए परेशान होना पड़ रहा है। किसान फोन और धरना-प्रदर्शन के माध्यम से अपनी समस्या बता रहे हैं।

उन्होंने कहा कि खेती के महत्वपूर्ण समय में खाद की कमी से फसल प्रभावित हो सकती है। सरकार खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करे और वितरण व्यवस्था ऐसी बनाए कि किसानों को अनावश्यक परेशानी न हो। केवल टोकन जारी करने से समस्या का समाधान नहीं होगा, किसानों तक खाद पहुंचना जरूरी है।

कम पानी में तैयार होने वाले बीज उपलब्ध कराएं
किसान संघ ने बीज की कमी का मुद्दा भी उठाया। आंजना ने कहा कि सूखे की स्थिति वाले जिलों में कम पानी में तैयार होने वाली फसलों के बीज उपलब्ध नहीं हैं। किसानों को जरूरत के मुताबिक कम सिंचाई में तैयार होने वाली फसलों के विकल्प नहीं मिल पा रहे हैं।

उन्होंने सरकार और कृषि विभाग से मांग की कि ऐसे बीज तत्काल प्रभावित जिलों तक पहुंचाए जाएं। कृषि विभाग की पूरी मशीनरी किसानों को समय पर बीज उपलब्ध कराने के लिए काम करे। पानी की कमी वाले क्षेत्रों में किसानों को कम सिंचाई में तैयार होने वाली फसलें लगाने के विकल्प मिलने चाहिए। समय पर बीज नहीं मिलने से बोवनी प्रभावित होने और आर्थिक नुकसान की आशंका है।

जमीन अधिग्रहण में किसानों के हितों का ध्यान रखें
प्रेस कॉन्फ्रेंस में आंजना से पूछा गया कि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और भारतीय किसान संघ जैसे लोग भी किसानों के मुद्दे उठा रहे हैं, फिर सरकार उनकी बात क्यों नहीं सुन रही। इस पर उन्होंने विकास परियोजनाओं और धार्मिक स्थलों पर बढ़ती भीड़ के कारण जमीन की जरूरत बढ़ने का मुद्दा उठाया।

उन्होंने उज्जैन के लैंड पूलिंग मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले जहां करीब एक लाख श्रद्धालु आते थे, वहां अब 18 लाख श्रद्धालुओं तक की संख्या पहुंच रही है। उज्जैन का महत्व बढ़ रहा है और आने वाले समय में श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ी भी धर्म की ओर बढ़ रही है। धार्मिक स्थलों पर बढ़ते दबाव के कारण सड़कों को चौड़ा करने, बड़े मार्ग बनाने और रेलवे परियोजनाओं के लिए जमीन की जरूरत पड़ रही है। इससे कुछ जगह तोड़फोड़ और जमीन अधिग्रहण की स्थिति बन रही है।

आंजना ने कहा कि पिछले 15 वर्षों में कई जगह अतिक्रमण भी बढ़ा है। विकास परियोजनाओं के लिए जमीन लेते समय किसानों के हितों का ध्यान रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सरकार पहले जमीन अधिग्रहण पर दो गुना मुआवजा देती थी, लेकिन अब किसान संघ की मांग के अनुसार चार गुना मुआवजे की व्यवस्था की गई है। उन्होंने इसे सरकार का अच्छा कदम बताया।

पथरीली जमीन पर कारखाने लगाने की मांग
आंजना ने कहा कि जिन क्षेत्रों में उपजाऊ जमीन है, वहां कारखाने लगाने से खेती प्रभावित हो सकती है। सरकार को कोशिश करनी चाहिए कि औद्योगिक इकाइयां ऐसी जमीन पर स्थापित हों, जहां पथरीली और कम उपजाऊ जमीन उपलब्ध है। इससे उद्योगों के लिए जमीन भी मिलेगी और कृषि योग्य भूमि बचाई जा सकेगी।

उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं में किसानों के हितों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। जमीन अधिग्रहण और औद्योगिक विस्तार के साथ यह भी देखना होगा कि किसानों की आजीविका पर क्या असर पड़ता है।

फसल उत्पादन घटा तो बढ़ सकती है महंगाई
किसान संघ ने चेतावनी दी कि फसल उत्पादन प्रभावित हुआ तो इसका असर किसानों के साथ आम जनता पर भी पड़ सकता है। आंजना ने कहा कि सब्जियों और दूसरी कृषि उपज की उपलब्धता प्रभावित होने पर बाजार में महंगाई बढ़ने का दबाव बन सकता है। इसका असर अंततः आम लोगों पर पड़ेगा। इसलिए सरकार को अभी से जरूरी व्यवस्थाएं दुरुस्त करनी चाहिए।

भारतीय किसान संघ ने बिजली कटौती रोकने, खाद-बीज उपलब्ध कराने, सिंचाई के लिए पानी की व्यवस्था सुधारने और घोषित समर्थन मूल्य पर खरीदी सुनिश्चित करने की मांग की है। संघ ने दशहरे तक का समय देते हुए कहा कि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो सरकार के खिलाफ बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

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