चित्तौड़गढ़। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के निर्देशानुसार किशोर विद्यार्थियों को उनके कानूनी अधिकारों एवं कर्तव्यों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से ‘ट्रांसफॉर्मेटिव मंगलवार’ (रूपांतरणकारी मंगलवार) अभियान संचालित किया जा रहा है। इस अभियान के तहत माह के दूसरे एवं चौथे मंगलवार को जिले के विभिन्न विद्यालयों में निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 तथा विद्यालय भवन की सुरक्षा से संबंधित विषयों पर विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इन शिविरों का आयोजन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, चित्तौड़गढ़ के तत्वावधान में किया जा रहा है।
इसी क्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, चित्तौड़गढ़ के अध्यक्ष मानसिंह चुण्डावत के निर्देशानुसार तथा सचिव योगिता पारीक के नेतृत्व में भामाशाह द्वारका प्रसाद काबरा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, पुरुषार्थी में विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। शिविर में विद्यार्थियों को शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत विद्यालय भवन की गुणवत्ता, सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण और बच्चों के अधिकारों के संबंध में जानकारी दी गई। साथ ही अभियान से संबंधित विद्यार्थियों की शिकायतों और समस्याओं का सरल भाषा में समाधान किया गया।
सुरक्षित स्कूल भवन और शिक्षा का अधिकार-
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव योगिता पारीक ने बताया कि निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के अंतर्गत बच्चों को सुरक्षित विद्यालय भवन, शौचालय, पेयजल और खेल मैदान जैसी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। उन्होंने बताया कि किसी भी बच्चे को दस्तावेजों के अभाव अथवा अन्य कारणों से शिक्षा के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
शिविर में विद्यार्थियों को सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने, उनके अधिकारों की रक्षा करने तथा शोषण, उत्पीड़न और दुर्व्यवहार से बचाव के उपायों के बारे में भी जानकारी दी गई। वक्ताओं ने बताया कि प्रत्येक बच्चे को भयमुक्त और सुरक्षित वातावरण में शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार है। बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अभिभावकों, शिक्षकों और समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सामूहिक जिम्मेदारी है।
जर्जर भवन और खुले बिजली तारों से रहें सावधान-
सचिव योगिता पारीक ने विद्यार्थियों को सुरक्षा संबंधी सावधानियों के बारे में बताते हुए कहा कि वे विद्यालय में जर्जर छतों के नीचे न बैठें, खुले बिजली के तारों और गीले प्लग को न छुएं तथा गंदे पेयजल स्रोतों से पानी न पिएं। यदि विद्यालय में किसी प्रकार की असुरक्षित स्थिति दिखाई देती है, तो इसकी सूचना तत्काल संस्था प्रधान या अपने माता-पिता को दें, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
न्यायिक अधिकारियों ने भी किया जागरूक-
अभियान के तहत जिले के विभिन्न विद्यालयों में न्यायिक अधिकारियों, लीगल एड डिफेंस काउंसिल के सदस्यों, पैनल अधिवक्ताओं और पैरालीगल वॉलंटियर्स ने भी विधिक जागरूकता शिविर आयोजित कर विद्यार्थियों को शिक्षा के अधिकार, विद्यालय भवन की सुरक्षा और बच्चों के संरक्षण से संबंधित जानकारी दी।
इन शिविरों में विशिष्ट न्यायाधीश एनडीपीएस प्रकरण संख्या-1 किशनलाल चौधरी, विशिष्ट न्यायाधीश पॉक्सो न्यायालय संख्या-1 लता गौड़, विशिष्ट न्यायाधीश पॉक्सो न्यायालय संख्या-2 शहनाज परवीन, पारिवारिक न्यायालय की न्यायाधीश अचला आर्या, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश क्रम संख्या-2 राजेश कुमार मीणा, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश क्रम संख्या-3 ब्रह्मानंद शर्मा, विशिष्ट न्यायाधीश एससी-एसटी न्यायालय देवेंद्र सिंह पंवार, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पंकज कुमार काबरा, अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अंशुमन सिंह खंगारौत, न्यायिक मजिस्ट्रेट तमन्ना कुमारी, अतिरिक्त न्यायिक मजिस्ट्रेट राजेश बजाड़, विशिष्ट न्यायिक मजिस्ट्रेट एनआई एक्ट मेघना यादव, ग्राम न्यायालय की न्यायिक अधिकारी वीणा सुवालका तथा किशोर न्याय बोर्ड की प्रधान मजिस्ट्रेट पूनम सेन सहित अन्य न्यायिक अधिकारियों एवं विधिक सेवा से जुड़े सदस्यों ने सहभागिता की।
अभियान के माध्यम से विद्यार्थियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने और विद्यालयों में सुरक्षित, भयमुक्त एवं बेहतर शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने का संदेश दिया गया।