नीमच। हिंदू-मुस्लिम एकता और आपसी भाईचारे की मिसाल नीमच में एक बार फिर देखने को मिल रही है। यहां मंजूर हुसैन का परिवार पिछले चार पीढ़ियों से दशहरे पर रावण दहन के लिए रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले बनाने की परंपरा निभाता आ रहा है। परिवार की यह पहल धार्मिक सद्भाव और सामाजिक एकता का संदेश दे रही है।
आज के दौर में जब समाज में आपसी भाईचारे और सद्भाव की आवश्यकता पर जोर दिया जाता है, ऐसे में मंजूर हुसैन का परिवार अपनी वर्षों पुरानी परंपरा और मेहनत के जरिए एकता की मिसाल पेश कर रहा है।
परिवार के करीब 25 सदस्य पिछले 20 दिनों से दिन-रात मेहनत कर दशहरे के लिए पुतले तैयार करने में जुटे हैं। इस बार करीब 41 फीट ऊंचा रावण का पुतला बनाया जा रहा है। इसकी खासियत यह होगी कि रावण का हाथ भी चलेगा और मुंह भी खुलेगा, जिससे पुतला दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बनेगा।
चार पीढ़ियों से चली आ रही इस परंपरा के जरिए मंजूर हुसैन का परिवार न केवल दशहरे के आयोजन में योगदान दे रहा है, बल्कि आपसी सद्भाव और मिल-जुलकर रहने का संदेश भी दे रहा है। इस बार रावण के पुतले में क्या खास तकनीक देखने को मिलेगी और इस परंपरा को आगे बढ़ाने के पीछे परिवार की क्या सोच है, यह जानना भी दिलचस्प होगा।