बालाघाट। शारदेय नवरात्र की अष्टमी पर रविवार को मां काली मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ी। व्रतधारी महिलाएं और पुरुष हलवा-पूरी के साथ अठवाई का भोग लेकर मंदिर पहुंचे। भक्तों ने मां काली को भोग अर्पित कर मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद मांगा। मान्यता है कि चौत्र और शारदेय नवरात्र, दोनों में अष्टमी का भोग सबसे पहले मां काली को लगाया जाता है। इसके बाद घरों में कन्या पूजन किया जाता है।
अष्टमी पर मां को भोग लगाने की परंपरा
मंदिर में अष्टमी का भोग लगाने पहुंचीं ठाकुर संगीतासिंह ने बताया कि जब से उन्होंने होश संभाला है, तब से हर नवरात्र में मां काली को अष्टमी का भोग लगाने आती हैं। उनका कहना है कि मां अपने भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती हैं। अठवाई का भोग लगाने के बाद घर में कन्या पूजन किया जाता है।
सपने में दर्शन देने पर हुई मंदिर की स्थापना
मां काली मंदिर का इतिहास करीब डेढ़ सौ साल पुराना बताया जाता है। मंदिर की सेवा कर रहे गोस्वामी परिवार के सदस्य पंकजगिरी गोस्वामी के अनुसार, उनकी दादी को एक रात मां ने सपने में दर्शन दिए थे। उन्होंने मंदिर की स्थापना करने की बात कही थी। इसके बाद परिवार ने यहां मंदिर स्थापित किया। समय के साथ भक्तों के सहयोग से मंदिर को भव्य स्वरूप दिया गया। मंदिर में प्राचीन काल की देवी-देवताओं की शिलाएं भी प्रतिमाओं के रूप में मौजूद हैं।
विवाह की हल्दी भी पहले मां को चढ़ाते हैं
मां कालीपाठ मंदिर से जुड़ी मान्यता के अनुसार, विवाह के दौरान दूल्हा या दुल्हन को लगाई जाने वाली हल्दी भी सबसे पहले मां को चढ़ाई जाती है। भक्त अष्टमी पर हलवा, पूरी, बताशा और पान अर्पित कर पूजा-अर्चना करते हैं।
मंदिरों में हवन-पूजन और कन्या भोज
अष्टमी पर मां काली मंदिर के अलावा कालीपाठ मंदिर, त्रिपुर सुंदरी मंदिर सहित अन्य मंदिरों में हवन-पूजन और नवकन्या भोज के आयोजन किए जा रहे हैं। शहर में नवरात्र के दौरान मंदिरों में धार्मिक कार्यक्रम हो रहे हैं। घरों में भी मनोकामना ज्योति कलश और ज्वारे की पूजा की जा रही है। रामनवमी पर मंदिरों में स्थापित ज्योति कलश का विधि-विधान से विसर्जन किया जाएगा।