चित्तौड़गढ़। प्रताप नगर सेवा केंद्र पर राजयोगिनी आशा दीदी ने बताया नवरात्रि का आध्यात्मिक महत्व, विकारों पर विजय प्राप्त कर जीवन में सकारात्मकता लाने का दिया संदेश।
नवरात्रि का पर्व भारत में बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस अवसर पर श्रद्धालु देवी पूजन, जागरण और व्रत के माध्यम से मां दुर्गा की आराधना करते हैं। लेकिन नवरात्रि का वास्तविक आध्यात्मिक रहस्य अपने भीतर छिपी शक्तियों को जागृत करना और मन के विकारों पर विजय प्राप्त करना है। यह विचार ब्रह्माकुमारीज प्रताप नगर सेवा केंद्र की संचालिका राजयोगिनी आशा दीदी ने व्यक्त किए।
आशा दीदी ने बताया कि नवरात्रि केवल देवी पूजन और बाहरी अनुष्ठानों का पर्व नहीं है, बल्कि यह आत्मिक जागृति और आंतरिक परिवर्तन का संदेश भी देता है। प्रत्येक मनुष्य के भीतर काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार, घृणा और नफरत जैसे विकार छिपे होते हैं। इन विकारों का नाश करके अपने भीतर की दिव्य शक्तियों को जागृत करना ही नवरात्रि का सच्चा आध्यात्मिक उद्देश्य है।
उन्होंने कहा कि हमें क्रोध के स्थान पर शांति, अधीरता के स्थान पर धैर्य और नकारात्मकता के स्थान पर सकारात्मकता को अपनाना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति के भीतर सहनशक्ति, निर्णय शक्ति, सामना करने की शक्ति और परिस्थितियों का सामना करने की क्षमता जैसी अनेक आंतरिक शक्तियां विद्यमान हैं। आवश्यकता केवल इन शक्तियों को पहचानने और जागृत करने की है।
परमात्मा की स्मृति ही सच्चा जागरण
राजयोगिनी आशा दीदी ने बताया कि परमात्मा की स्मृति में रहना और अपनी खोई हुई आंतरिक शक्तियों का आह्वान करना ही सच्चा जागरण है। जब मनुष्य राजयोग के अभ्यास द्वारा अपने मन और बुद्धि का संबंध परमात्मा शिव से जोड़ता है, तो उसे आंतरिक शांति, आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा की अनुभूति होती है। इससे जीवन की चुनौतियों का सामना करने की शक्ति मिलती है और व्यक्ति अपने व्यक्तित्व को श्रेष्ठ बना सकता है।
नारी शक्ति का सम्मान ही देवी पूजन का संदेश
आशा दीदी ने नारी शक्ति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नारी का हर रूप पूजनीय है। नारी को सृष्टि के नव निर्माण और संस्कारों के संवर्धन का आधार माना गया है। उन्होंने कहा कि देवी शक्तियों को शिव शक्ति कहा जाता है, क्योंकि आध्यात्मिक मान्यता के अनुसार ये शक्तियां परमात्मा शिव से शक्ति प्राप्त करती हैं। परमात्मा शिव की स्मृति और श्रेष्ठ कर्मों के माध्यम से मनुष्य अपने जीवन को दिव्य गुणों से संपन्न बना सकता है।
उन्होंने संदेश दिया कि नवरात्रि के पावन अवसर पर हमें केवल देवी स्वरूपों की पूजा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपने जीवन में शांति, प्रेम, करुणा, सहनशीलता और पवित्रता जैसे गुणों को धारण करना चाहिए।
अपने भीतर की शक्तियों को पहचानें
अंत में आशा दीदी जी ने कहा कि नवरात्रि हमें अपनी आंतरिक शक्तियों को पहचानने, नकारात्मक विचारों का त्याग करने और परमात्मा शिव से बुद्धियोग जोड़कर अपने जीवन को श्रेष्ठ बनाने की प्रेरणा देती है। जब हम अपने भीतर के विकारों पर विजय प्राप्त कर दिव्य गुणों को अपनाते हैं, तभी नवरात्रि का आध्यात्मिक संदेश हमारे जीवन में सार्थक होता है।