गरोठ-कोटड़ाबुजुर्ग। ग्राम कोटड़ाबुजुर्ग स्थित प्राचीन बावड़ी वाली माताजी मंदिर क्षेत्र के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। मान्यता है कि यह मंदिर प्राचीन काल से ही गांव की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा हुआ है। मंदिर में पिछले 34 वर्षों से अखंड ज्योत प्रज्वलित है। इसकी सेवा और पूजा-अर्चना पंडित कारूलाल भील ठाकुर द्वारा निरंतर की जा रही है।
मंदिर में प्रतिवर्ष नवरात्रि के दौरान नौ दिनों तक अखंड भजन-कीर्तन का आयोजन भी किया जाता है। इस दौरान मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण से गूंज उठता है और श्रद्धालु माता रानी की आराधना में लीन रहते हैं।
प्राचीन बावड़ी के नाम से प्रसिद्ध है मंदिर-
मंदिर परिसर में प्राचीन काल की एक बावड़ी स्थित है। इसी बावड़ी के कारण यह स्थान बावड़ी वाली माताजी मंदिर के नाम से प्रसिद्ध है। गांव सहित आसपास के क्षेत्रों के लोगों की इस मंदिर के प्रति गहरी आस्था है। श्रद्धालु यहां पहुंचकर माता रानी के दर्शन करते हैं और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
गांव की सुख-समृद्धि के लिए निकाली जाती है ज्वारों की यात्रा-
गांव की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना के साथ यहां एक विशेष धार्मिक परंपरा निभाई जाती है। वर्ष में एक बार माताजी के ज्वारे लेकर गांव में यात्रा निकाली जाती है। यात्रा के बाद ज्वारों को नदी में प्रवाहित किया जाता है। इस परंपरा में ग्रामीण श्रद्धा और विश्वास के साथ भाग लेते हैं।
दूर-दूर से दर्शन करने पहुंचते हैं श्रद्धालु-
बावड़ी वाली माताजी मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए कोटड़ाबुजुर्ग सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। 34 वर्षों से प्रज्वलित अखंड ज्योत, प्राचीन बावड़ी और अनूठी धार्मिक परंपराओं के कारण इस मंदिर की क्षेत्र में विशेष पहचान है।
बावड़ी वाली माताजी का यह पवित्र धाम गांव की आस्था, धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक बना हुआ है।