चित्तौड़गढ़। स्वर्णकार समाज सेवा संस्थान, बापूनगर-सैंती के चुनाव सर्वसम्मति से निर्विरोध संपन्न हुए। इसमें मनोहरलाल बुकन को अध्यक्ष, लक्ष्मीलाल सोलीवाल को मंत्री तथा श्रवणकुमार रूणवाल को कोषाध्यक्ष मनोनीत किया गया।
संस्थान की बैठक में समाज के परिवारों के मुखियाओं ने भाग लिया। बैठक में चुनाव प्रक्रिया के बजाय सर्वसम्मति से पदाधिकारियों के चयन का सुझाव दिया गया, जिसे सभी ने स्वीकार किया। इसके बाद सर्वसम्मति से अध्यक्ष, मंत्री और कोषाध्यक्ष का मनोनयन किया गया।
इस अवसर पर नगर परिषद चित्तौड़गढ़ के सभापति अनिल कुमार ईनाणी, उपसभापति सुदर्शन कुमार रामपुरिया तथा पार्षद अशोक कुमार बुकन का साफा, उपरना और शॉल ओढ़ाकर सम्मान किया गया। सभापति अनिल कुमार ईनाणी ने नवनियुक्त पदाधिकारियों को उपरना ओढ़ाकर सम्मानित किया तथा उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाकर प्रमाण पत्र प्रदान किए।
नवनियुक्त पदाधिकारियों ने संस्थान की कार्यकारिणी का भी गठन किया। इसमें नानालाल टांक, बद्रीलाल रूणवाल और रतनलाल तुनगर को संरक्षक बनाया गया। सत्यनारायण ददोलिया और भरत कुमार कुलथिया को उपाध्यक्ष, विनोद कुमार तुनगर को सहकोषाध्यक्ष तथा मिठूलाल बुकन को सहमंत्री मनोनीत किया गया।
इसी प्रकार नवनीत रूणवाल, प्रहलादराय ददोलिया, ओंकारलाल अग्रोया और पुरुषोत्तम बुकन को संगठन मंत्री बनाया गया। मुकेश कुलथिया को सांस्कृतिक मंत्री, कृष्णचंद लांबा को सामाजिक चेतना मंत्री, कालूलाल तुनगर और पुरणमल स्वर्णकार को विधि सलाहकार तथा माणिकचंद टांक को प्रवक्ता की जिम्मेदारी सौंपी गई।
कार्यकारिणी के सदस्य के रूप में संजय कुमार उदावत, जयप्रकाश सोलीवाल, राजेश कुमार डाबर, बलराम ददोलिया, मुकेश मलेण्डिया, गौरव कुमार बेराडिया, राजकुमार जवड़ा, राजेन्द्र कुमार बवेरिया, अशोक कुमार मलेण्डिया और राजेन्द्र कुमार बामला को मनोनीत किया गया।
बैठक के दौरान समाज की ओर से सामाजिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए भूमि आवंटित करने की मांग को लेकर नगर परिषद सभापति अनिल कुमार ईनाणी को ज्ञापन भी सौंपा गया। सभापति ने समाज के सदस्यों और नवनियुक्त कार्यकारिणी को बधाई दी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता नानालाल टांक ने की। स्वागत भाषण मनोहरलाल बुकन ने दिया, जबकि आभार श्रवणकुमार सोनी ने व्यक्त किया। आमंत्रित अतिथि नगर अध्यक्ष सत्यनारायण रूणवाल और नवयुवक मंडल अध्यक्ष विकास कुमार सोलीवाल का भी उपरना ओढ़ाकर सम्मान किया गया। बैठक के बाद स्वभोज का आयोजन हुआ।