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February 26, 2023, 12:36 pm
KHABAR : वर्ष 2007 में शुरू हुई उपमंडी की सुध लेने वाला कोई नहीं, दो दशक बाद भी नहीं हुआ भण्डारण की समस्या का हल, पढ़े अजयसिंह सिसोदिया के साथ शेख इसाक की खबर  

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रामपुरा। नगर की कृषि उप मंडी वर्ष 2007 में शुरू हुई थी। लगभग दो दशक से ज्यादा होने के बाद भी उपमंडी में क्या विकास हुआ होगा उसका अंदाजा आप प्रवेश द्वार के गिरे हुए बोर्ड से ही लगाया जा सकता है। जब मंडी शुरू हुई तब प्रशासन द्वारा लगभग 40 व्यापारियों के लाइसेंस जारी किये थे। लेकिन वर्तमान में लाइसेंस धारी 10 व्यापारी है व 2 व्यापारी का लाइसेंस का नवीनीकरण नही हुआ है। क्या प्रशासन द्वारा ऐसे व्यापारियों के खिलाफ कार्रवाई की जो लाइसेंस लेने के बाद भी व्यापार मंडी के बजाय बाहर कर रहे है। दो दशक के बाद भी अभी तक मंडी में भण्डारण की समस्या क्यों हल नहीं हुई क्यों किसान अपना अनाज मंडी में लाने से कतराता है कही मंडी प्रशासन व अनाज व्यापारियों की मिली भगत का नतीजा तो नही। 

सूत्रों से पता चला है कि यहाँ प्रदेश सरकार को टैक्स न देना का खेल भी चल रहा है, कृषि उप मंडी शुरू हुए दो दशक से ज्यादा हो गए है अंदाजा लगा सकते है की प्रदेश सरकार को टैक्स का कितना नुकसान हुआ होगा। सूत्रों से यह भी पता चला है कि राजनिती से सबंध रखने वाले व्यापारियों के चलते तुलावटी कांटो में गड़बड़ी मंडी में जितनी आवक होती है उससे कम की पर्ची बनवाई जाती है और यह सब मंडी प्रशासन व अनाज व्यापारियों की मिली भगत से होकर प्रदेश सरकार को टैक्स का नुकसान करते है गेंहू, धनिया, चना, रायड़े की फसल के बाद अब गर्मी में खेल होगा। खरबूजे के बीजो का प्रदेश सरकार ने खरबूजे के बीज को मंडी अधिसुची में शामिल कर टैक्स लगा दिया। ताकि सरकार को आय मिल सके, लेकिन अलग-अलग राजनिती से सबंध रखने वाले व्यापारी एक होकर खरबूजे के बीज को लेकर किसानो को मंडी में नही जाने देते है। बल्कि हर गाँव में इन व्यापारियों द्वारा दुकाने खोल कर किसानो से खरबूजे के बीजो को खरीद लिया जाता है और वाहनों के द्वारा पडोसी राज्य राजस्थान होकर उत्तरप्रदेश के हाथरस जहाँ खरबूजे के बीज की सबसे ज्यादा मांग होती है वहां पहुंचा दिया जाकर  प्रदेश सरकार को लाखों की चपत लगा दी जाती है। गत वर्ष भी मंडी प्रशासन द्वारा मात्र दिखावे के लिए खरबूजे के बीजो को मंडी में लाने के लिए अनाउंस करवाकर इतिश्री कर ली कुछ बीज मंडी में आया बाद मिली भगत से खुल कर मंडी के बाहर व्यापार चलता रहा। स्थानीय स्तर के व्यापारियों द्वारा आपसी राजनिति तालमेल कर बीजो को खरीद कर बाहर सीधे व्यापारियों को बेचकर खुद बड़ा मुनाफा कमाकर प्रदेश सरकार को टैक्स का लाखो का नुकसान कर रहे है।

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