चित्तौड़गढ़। परम प्रतापी आचार्य भगवन, उपाध्याय भगवन का बोजून्दा से शान्ति भवन सेंती चित्तौड़गढ़ में पदार्पण जयघोषों के साथ हुआ।
शुक्रवार नवदीक्षिता महासती श्री रामशिष्या जी म सा व नवदीक्षिता महासती श्री रामदर्शना जी म सा की बड़ी दीक्षा का पावन प्रसंग था। इस अवसर पर अनुपम दीक्षा प्रदाता आचार्य भगवन ने अपनी दिव्यदेशना में कहा कि सभी प्रवृतियों में केन्द्र बिन्दु आत्महित ही होना चाहिये। यह दृष्टिकोण बन गया तो गलत दिशा में हमारे कदम नहीं बढेंगे। स्वार्थ की भावना हमारे धुत्त विचारों को दबोच लेती है। जो कार्य हमसे नहीं होना चाहिये वो कार्य हमसे स्वार्थ बुद्धि करा लेती है। सहन करना कायरता नहीं वीरता है। प्रतिकूलता में भी मन में विचार विपरीत नहीं होना चाहिये। प्रतिकार करने में शक्ति घटती है, कर्मबंध की स्थिति बनती है। स्वयं को नियंत्रित रखना होगा। आत्महित की दृष्टि सामने रखनी होगी। शक्ति आत्महित में लगे तो आत्मा दू्रतगति से मोक्ष दिशा में बढ़ती है। क्रोध के समय अपने आपको शांत रखें।
प्रवचन सभा को सम्बोधित करते हुए उपाध्याय प्रवर श्री राजेशमुनि जी म सा ने कहा कि मोक्षप्राप्ति का सबसे सरल मार्ग संयम ही है, सीधा मुक्ति की ओर ले जाने वाला है। गुरू के चरण हमें मुक्ति की ओर चरण बढ़ाने हेतु प्राप्त हुए है जो सहज है सरल है निष्कपट है, जिनमें लुकाव छिपाव नहीं है जो प्रकृति के समीप है, जो नैसर्गिक है जो कृत्रिमता से बचा हुआ है। ऐसे व्यक्ति शीघ्रातीशीघ्र लक्ष्य प्राप्त करते हैं। संयम जीवन सरलता का जीवन है। दीक्षा का प्रसंग सरलता को परिष्कृत करने का है एवं सरलता को शोभायमान करने का प्रसंग है।
प्रवचन सभा को पूर्व में सम्बोधित करते हुए शासनदीपक श्री आदित्यमुनि जी म सा ने कहा कि आज जो भी किया जा रहा है ऐसी लाईफस्टाइल में हम कितने भव में मोक्ष में जायेंगे। यह विचार करना है। आसक्ति रहित जीवन से कल्याण होगा। क्रोध नहीं करना चाहिये। समभाव में रहना होगा। अनेक उदाहरणों से धर्मसभा को धर्ममय बनाया।
उपाध्याय प्रवर श्री राजेशमुनि जी म सा ने बड़ी दीक्षा विधि प्रारंभ करते हुए दसवेंकालिक सूत्र के चार अध्ययन का पठन करते हुए दोनों नवदीक्षिता महासतियों को सम्पूर्ण रूप से हिंसा झूठ चोरी मैथून परिग्रह व रात्रिभोजन का त्याग कराकर मन वचन काया से महाव्रतों में आरोहण कराया। नवदीक्षिता साध्वियों ने अपने संकल्प पत्र का वाचन करते हुए फरमाया कि हम सभी नियम सिद्धान्तों का निष्ठापूर्वक आचार्य भगवन के निर्देशानुसार पालन करेंगे। आपने संसार रूपी कीचड़ से बाहर निकलकर संयम में आगे बढ़ाया है। आपकी ही कृपा से कषायों व इन्द्रियों पर विजय से सिद्ध मुक्त बने यही भावना है।
शासनदीपिका श्री प्रेमलता जी म सा आदि ने मेरे गुरूवर मेरे भगवान आ गए, अयोध्या में जैसे राम आ गए, गुरूभक्ति गीत प्रस्तुत किया। महासती श्री खंतीप्रिया जी म सा ने धन्य धन्य रामचरण पाया चौपाई प्रस्तुत की। सभा का संचालन सेंती संघ मंत्री विमल कुमार कोठारी ने करते हुए आज के अवसर को स्वर्णिम अवसर बताया एवं आचार्य भगवन से अधिकाधिक विराजने की विनती की। महेश नाहटा ने महापुरूषों व वीर परिवारों से प्रेरणा लेने का निवेदन किया। विभिन्न त्याग प्रत्याख्यान कराए जिनमें 12 एकासना, 12 आयम्बिल, 12 उपवास कई भाई बहिनों ने लिया। समता बहु मण्डल ने मंगल गीत प्रस्तुत किया। शीलव्रत का प्रत्याख्यान दिनेश सहलोत एवं सत्यनारायण काकड़ा ने लिए। निफाड़ नंदूरबार, देशनोक, गंगाशहर, भीनासर, दूर्ग, भदेसर, उदयपुर, कोलकाता, नीमच, कपासन, प्रतापगढ़ आदि अनेक स्थानों के श्रावकों ने गुरूदेव के प्रवचन का लाभ लिया। शान्तिलाल उषाबाई बोहरा उदयपुर ने नियम व्रत ग्रहण किया। उत्क्रान्ति नियमानुसार सादगीपूर्ण कार्यक्रम करने एवं किसी प्रकार का उपहार लेन देन नहीं करने का प्रत्याख्यान लिया। एक अलग कार्यक्रम में वीर माता पिता विजय जी, सुनिता जी बाफना निफाड़ एवं दिनेश जी जयश्री जी कोटड़िया नंदूरबार का चित्तौड़गढ़ संघ की ओर से स्वागत बहुमान किया ।