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March 23, 2024, 11:33 am
KHABAR : राम की सेना ने विशाल समुद्र पर किया सेतु निर्माण, अंगद ने भरी सभा में रावण को ललकारा, रावण अंगद संवाद ने जनता को किया आनंदित, पढ़े शब्बीर बोहरा की खबर 

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मनासा। माता सीता की खोज के बाद हनुमान जी ने सारा वृतांत भगवान श्रीराम को सुनाया। भगवान ने लंका पर चढाई करने के लिए समुन्द्र किनारे रामेश्वर धाम की स्थापना की व समुन्द्र से लंका तक पहुंचने का रास्ता मांगा। समुद्र ने भगवान को वानर सेना में शामिल नल नील जिन्हें वरदान था कि इनके हाथों जो भी वस्तु पानी में फेकी जाएगी वो कभी नहीं डूबेगी। उनके हाथों सेतु निर्माण की बात कही। तब भगवान के कहे अनुसार नल नील ने विशाल समुद्र पर सेतु निर्माण किया। 

यह दृश्य था गांव नलखेड़ा में चल रही हाथरस की तर्ज पर आधारित रामलीला के दसवें दिन का। यहां कवि पंडित मदनलाल शर्मा ने उपस्थित जनता को बताया कि जब नल नील विशाल समुद्र पर सेतु निर्माण का कार्य कर रहे थे। तभी भगवान राम ने भी एक पत्थर समुन्द्र में फेंका लेकिन वह डूब गया। यह सब हनुमान देख रहे थे, तब भगवान ने हनुमानजी से पुछा की मेरे द्वारा समुद्र में फेंका गया पत्थर डूब गया, जबकि नल नील द्वारा फेंके गए पत्थर तेर रहे तो, हनुमान जी ने हंसकर बडी ही सुन्दर बात कही की हे प्रभु आप तो दया के सागर है जिसका हाथ पकड़ लेते हैं वो भव सागर से तर जाता है ओर जिसका हाथ आप छोड़ देते हैं उसका डूबना तो निश्चित तय हैं, तो है प्रभु आपके द्वारा फेंका गया पत्थर डूब गया ओर नल नील द्वारा फेंके गए पत्थर तेर रहे हैं। सेतु निर्माण के बाद राम की सेना द्वारा लंका पर चढ़ाई कर अंगद दूत बनकर रावण की सभा में पहुंचते हैं। जहां पर अंगद रावण को भगवान राम का संदेश सुनाते हुए कहते हैं कि, है रावण प्रभु श्री राम तीनों लोकों के स्वामी हैं ओर तु एक जुगनु के समान भी नहीं है, तो है रावण प्रभु श्री राम ने मुझे दूत बनाकर यहां भेजा ओर कहा कि रावण से कहना वो सीता को छोड़ दें ओर मेरी शरण में आ जाए मैं अब भी रावण को क्षमा कर दूंगा। ताकि रावण के साथ लंका की निर्दोष जनता युद्ध में नहीं मारी जाए। लेकिन अपने अहंकार के मद में चुर रावण ने अंगद की बात को अनसुना कहते हुए टाल दिया। इस दोरान अंगद ने रावण की सभा में अपना पांव खंभ की तरह जमा दिया। जिसे सभा में उपस्थित रावण के योद्धा तनिक भी हिला नहीं पाए का सजीव चरित्र चित्रण युवा कलाकारों ने रामलीला के मंच से किया। इसमें अंगद की भूमिका विजय शर्मा, रावण-कैलाश राठोर, मंदोदरी-प्रदीप लोहार, राम-राहुल पाटीदार, सुग्रीव-दशरथ शर्मा, प्रहस्त-सोहन सेन, जामवंत-पंकजमोड़ ने निभाई। अतिथि डाक्टर बबलु राठोर, समाजसेवी गोपाल धनगर, मुकेश जैन सहित बड़ी संख्या में गांव सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोग उपस्थित थे।

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