चित्तौड़गढ़। गांधीनगर स्थित नानू नवकार भवन में सुज्ञ श्रावक श्राविकाओं को सम्बोधित करते हुए शांतक्रांति संघ की विदूषी महासती शीलप्रभा ने कहा कि मानव जीवन मिलना अत्यंत दुर्लभ है अतः प्राप्त मानव जीवन को जिनेश्वर भगवंत की आज्ञा अनुसार राग द्वेष घटाते हुए भव परम्परा को सीमित करने की दिशा में सम्यक पुरुषार्थ करते रहना चाहिए। झूठ सच एवम् मोह माया में उलझ कर चक्करगिन्नी की तरह अनंत काल से भव भ्रमण करते हुए आज़ हमें पुण्ययोग से मानव जन्म मिला है इसलिए इसको सार्थक करने के लिए निर्ग्रंथ गुरुओं का सानिध्य एवम् उनसे प्रेरणा प्राप्त करते हुए आत्म विकास के रास्ते पर चलने की दिशा में अग्रसर होना चाहिए। इससे पूर्व साध्वी सत्यप्रभा ने कहा कि जिनवाणी श्रवण करने से विचारों में, वर्तन व्यवहार में एवम् जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है जो हमें आध्यात्मिक क्षैत्र में निरंतर आगे बढ़ाता है। महासती नित्यप्रभा ने कहा कि जन्म, ज़रा, रोग और बुढ़ापा के दुखों से हम सब दुःखी हो रहे हैं अतः हमें ज्ञान, दर्शन, चारित्र और तप की सम्यक आराधना करके जन्म, मरण के दुःख से मुक्त होने की दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए। मैने भी संसार के भयंकर दुखों को देखा और अनुभव किया एवम् संसार की आसारता को जाना तो मन में वैराग्य उत्पन्न हो गया और बाद में यथा समय माता पिता एवम् परिजनों की आज्ञा प्राप्त कर 22 फ़रवरी 2023 को विजयनगर में आचार्य 1008 श्री विजयराज जी म सा के पवित्र पावन मुखारविंद से जैन भागवती दीक्षा अंगीकार करने के बाद गुरुनी मैय्या के मार्गदर्शन में ज्ञान, दर्शन, चारित्र और तप की सम्यक आराधना हेतु सजग हूं। महासती पुण्यप्रिया द्वारा प्रवचन में से प्रश्न पूछ कर उत्तर प्राप्त किए गए। धर्म सभा में यामिनी बोहरा एवम् पूनम सेठिया ने बहुत ही सुन्दर गीतिका प्रस्तुत की। साध्वी रत्ना राजश्री जी म सा ने आशा पटवारी को 9 उपवास एवम् अन्य प्रत्याख्यान ग्रहण कराने के बाद मंगल पाठ सुनाया। संचालन पारस मल सोनी ने किया।