नीमच। जिला अस्पताल में उपचार के बाद स्वस्थ होकर घर लौटने की उम्मीद लगाए बैठी एक बुजुर्ग महिला की अचानक मौत ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों ने डॉक्टरों एवं नर्सिंग स्टाफ पर समय पर उपचार नहीं देने का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया और मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।
जानकारी के अनुसार, रामपुरा निवासी 67 वर्षीय ग्यारसी बाई पत्नी मातानाथ योगी को 13 जुलाई को गंभीर एनीमिया की शिकायत के चलते जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों के मुताबिक भर्ती के समय उनका हीमोग्लोबिन मात्र 4 ग्राम था, जिसके बाद उन्हें तीन यूनिट रक्त चढ़ाया गया। उपचार के बाद उनकी तबीयत में लगातार सुधार हो रहा था और जल्द ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिलने की उम्मीद थी।
परिजनों का आरोप है कि गुरुवार शाम अचानक ग्यारसी बाई को घबराहट और चक्कर आने लगे। उन्होंने कई बार डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को बुलाने का प्रयास किया, लेकिन समय पर कोई नहीं पहुंचा। आरोप है कि उपचार मिलने में हुई देरी के कारण महिला की मौत हो गई।
महिला की मौत की खबर फैलते ही अस्पताल परिसर में आक्रोश का माहौल बन गया। परिजनों और समाजजनों ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाया और निष्पक्ष जांच की मांग की।
सूचना मिलने पर प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. संगीता भारती एवं डॉ. मनीष यादव मौके पर पहुंचे और परिजनों को समझाइश देते हुए मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया। प्रभारी सिविल सर्जन ने बताया कि मरीज गंभीर एनीमिया से पीड़ित थी और निर्धारित चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के अनुसार उसका उपचार किया जा रहा था। यदि जांच में यह सामने आता है कि सूचना मिलने के बावजूद संबंधित स्टाफ समय पर नहीं पहुंचा, तो दोषी कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना केवल एक मरीज की मौत तक सीमित नहीं है, बल्कि जिला अस्पताल की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं, मरीजों की सतत निगरानी और जवाबदेही व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती है। अब सभी की निगाहें प्रस्तावित जांच और उसकी निष्पक्षता पर टिकी हुई हैं।