जबलपुर। शहर में डेंगू तेजी से पैर पसार रहा है, यही वजह है की शहर में जनवरी से लेकर अब तक डेंगू के 195 पॉजिटिव केस सामने आए है। प्रतिदिन 5-7 डेंगू पॉजिटिव के मरीज सामने आ रहे है। डेंगू से अब तक शहर में तीन लोगों की मौत हो चुकी है लेकिन उनका एलाइजा टेस्ट नहीं होने के चलते मौत की संख्या सरकारी पोर्टल पर दर्ज नहीं की गई है। कुछ ऐसा ही हल प्रदेश के दूसरे जिलों का भी है। यही वजह है कि आज मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने प्रदेश में तेजी से पैर पसार रहे डेंगू को लेकर एक मैराथन बैठक ली। एक्शन मोड में आए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वास्थ्य और निगम अधिकारियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मैराथन बैठक ली। बैठक में मुख्यमंत्री ने शहर में फैल रहे डेंगू और सीजनल बीमारियों से लड़ने और उनके रोकथाम के लिए उचित कदम उठाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग की अलग-अलग टीम बनाकर डेंगू प्रभावित और बस्तियों में दौरा करने की निर्देश दिए हैं।
शहर में कराई जाएगी मुनादी
सीएम के निर्देश के बाद निगम और स्वास्थ्य विभाग के अमले ने अब 16 टीम में बनाकर जागरूकता अभियान चलाने का निर्णय लिया है। स्वास्थ्य विभाग के इस अभियान में नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग की टीम भी शामिल रहेगी, जो डेंगू प्रभावित बस्ती वाले इलाकों में जाकर लोगों को डेंगू के प्रति जागरूक और उनसे बचने के उपाय के बताएंगे।
स्वास्थ्य विभाग को जानकारी नहीं दे रहे निजी अस्पताल
सीएमएचओ ने निजी अस्पतालों को और जनहित में अपील की है कि यदि किसी तरह के डेंगू के मरीज सामने आते हैं, स्वास्थ्य विभाग को भी इस बात की जानकारी दें। स्वास्थ्य विभाग समय रहते इससे निपटने के लिए इंतजाम कर सके। स्वास्थ्य विभाग के पास भी डेंगू मरीजों का आंकड़ा मौजूद हो।
निजी अस्पतालों के आंकड़े नहीं गिने जाते
बता दें कि डेंगू के चलते सिर्फ सरकारी अस्पताल ही नहीं बल्कि प्राइवेट अस्पताल भी भरे पड़े हुए हैं, लेकिन निजी अस्पतालों में मिलने वाले डेंगू की मरीजों की संख्या सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हो पाती। इसके पीछे की वजह यह है कि निजी अस्पतालों की डेंगू की रिपोर्ट मान्य नहीं है। निजी अस्पतालों में हुए टेस्ट का जब तक एलाइजा टेस्ट नहीं होता उसे सरकारी पोर्टल में दर्ज नहीं किया जा सकता। यही वजह है कि शहर में डेंगू के वास्तविक आंकड़े ना तो सरकार और नहीं स्वास्थ्य विभाग के पास है।