नीमच। कभी बादलों की गर्जना और बारिश की बूंदों से उम्मीदों की हरियाली देखने वाला नीमच जिला इन दिनों आसमान की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहा है। खरीफ फसलों की बोवनी पूरी होने के बाद अब किसानों को एक अच्छी बारिश का बेसब्री से इंतजार है। पिछले तीन दिनों से जिले में बारिश का दौर थमा हुआ है, जिससे खेतों में खड़ी फसलों की चिंता बढ़ने लगी है।
गांवों में दिखने लगा बारिश की बेरूखी का असर-
बारिश की बेरुखी का असर अब गांवों में साफ दिखाई देने लगा है। कई क्षेत्रों में तालाब, नदी-नाले और कुएं जलस्तर की कमी के कारण सूखे नजर आ रहे हैं। किसान मान रहे हैं कि यदि आने वाले दिनों में मानसून ने रफ्तार नहीं पकड़ी तो फसलों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है और मेहनत व लागत का संकट खड़ा हो सकता है।
मौसम विभाग ने जारी नहीं किया भारी बारिश का अलर्ट-
इधर मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक बादल छाए रहने और कहीं-कहीं हल्की बारिश का दौर जारी रहने की संभावना जताई है। फिलहाल प्रदेश में कहीं भी भारी बारिश का अलर्ट जारी नहीं किया गया है। रविवार को इंदौर सहित कुछ जिलों में बूंदाबांदी की संभावना जताई गई है। वहीं नीमच सहित मंदसौर, रतलाम, उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में मौसम साफ रहने का अनुमान है। पिछले तीन दिनों से प्रदेश में तेज बारिश नहीं होने के कारण तापमान में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
पिछले साल के मुकाबले 2.2 इंच कम बारिश-
अधीक्षक भू-अभिलेख कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार चालू मानसून सत्र में 1 जून से 12 जुलाई सुबह 8 बजे तक नीमच जिले में औसत 10.17 इंच वर्षा दर्ज की गई है, जबकि गत वर्ष इसी अवधि में 12.41 इंच औसत वर्षा रिकॉर्ड की गई थी। तहसीलवार आंकड़ों के अनुसार नीमच में 13.11 इंच, जावद में 9.41 इंच, सिंगोली में 9.48 इंच तथा मनासा में 8.66 इंच बारिश दर्ज हुई है।
पिछले 24 घंटे में नहीं हुई बारिश, विकासखंडवार भी पिछड़ा-
पिछले 24 घंटे में भी जिले की किसी तहसील में बारिश दर्ज नहीं की गई। नीमच, जावद, मनासा और सिंगोली चारों तहसीलों में मौसम पूरी तरह शुष्क रहा। वहीं पिछले वर्ष इसी अवधि में नीमच में 11.93 इंच, जावद में 15.83 इंच, सिंगोली में 17.68 इंच तथा मनासा में 7.91 इंच वर्षा हुई थी। आंकड़ों से स्पष्ट है कि इस वर्ष जिले के अधिकांश क्षेत्रों में पिछले साल की तुलना में कम बारिश दर्ज की गई है।
फसलों की अच्छी बढ़वार के लिए लगातार बारिश की दरकार-
नीमच जिले के किसानों का कहना है कि शुरुआती बारिश से बोवनी का कार्य तो पूरा हो गया है, लेकिन अब फसलों की अच्छी बढ़वार के लिए लगातार बारिश जरूरी है। यदि मानसून ने जल्द गति नहीं पकड़ी तो खरीफ फसलों पर इसका असर देखने को मिल सकता है।