नीमच। राजस्थान और गुजरात से रॉयल्टी चुकाकर रेत मंगाकर कारोबार करने वाले व्यापारियों ने नीमच में खनिज विभाग की कार्रवाई पर नाराजगी जताई है। गुरुवार को रेत सामग्री व्यापारी संघ ने कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपकर वैध रेत के भंडारण एवं स्थानीय परिवहन के लिए स्पष्ट व्यवस्था बनाने की मांग की।
व्यापारियों का कहना है कि नीमच जिले में रेत की खदानें नहीं होने के कारण उन्हें राजस्थान और गुजरात से रॉयल्टी-पेड रेत मंगानी पड़ती है। डंपर और ट्रेलर के माध्यम से आने वाली रेत को छोटे निर्माण कार्यों तथा संकरी गलियों तक पहुंचाने के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली से सप्लाई किया जाता है। व्यापारियों का आरोप है कि इसी तरह वैध रूप से खरीदी गई रेत के स्टॉक और स्थानीय परिवहन को अवैध बताकर कार्रवाई की जा रही है।
व्यापारियों ने माना- भंडारण की लिखित अनुमति नहीं
मामले में दूसरा पहलू भी सामने आया है। व्यापारी प्रतिनिधियों ने स्वीकार किया कि उनके पास रेत भंडारण की लिखित अनुमति नहीं है। उनका कहना है कि रेत वैध और रॉयल्टी-पेड है तथा निजी जमीन पर रखी जाती है, लेकिन भंडारण लाइसेंस की प्रक्रिया जटिल होने के कारण छोटे व्यापारियों को परेशानी होती है। व्यापारियों ने कहा कि यदि प्रक्रिया सरल की जाती है तो वे तत्काल आवश्यक लाइसेंस लेने के लिए तैयार हैं।
खनिज अधिकारी बोले- बिना अनुमति भंडारण वैध नहीं
खनिज अधिकारी जेएस भिंडे ने बताया कि व्यापारियों से आवेदन लिए जा रहे हैं और नियमानुसार अनुमति देने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना अनुमति रेत का भंडारण वैध नहीं है और ऐसी स्थिति में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
छोटे व्यापारियों के लिए सरल अनुमति की मांग-
व्यापारियों ने एक-दो डंपर तक छोटे स्तर पर रेत भंडारण के लिए सरल अनुमति व्यवस्था बनाने तथा ट्रैक्टर-ट्रॉली के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रेत की सप्लाई के लिए स्पष्ट नियम तय करने की मांग की है।
फिलहाल विवाद का मुख्य मुद्दा यह है कि राजस्थान और गुजरात से रॉयल्टी चुकाकर लाई गई रेत को नीमच में किस प्रक्रिया के तहत वैध रूप से भंडारित और विक्रय किया जा सकता है, इसे लेकर व्यापारियों और खनिज विभाग के बीच स्पष्टता की जरूरत बनी हुई है।