भोपाल। प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था और भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता को लेकर छात्र संगठनों का आंदोलन तेज होता नजर आ रहा है। आंदोलनकारियों ने 15 सूत्रीय मांगपत्र जारी कर सरकार से शिक्षा, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े कई अहम मुद्दों पर व्यापक सुधार की मांग की है।
आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों का आरोप है कि मौजूदा व्यवस्था में छात्र हितों की अनदेखी हो रही है। पेपर लीक, निजीकरण, वर्षों से खाली पड़े सरकारी पदों पर भर्ती नहीं होने और परीक्षा व्यवस्था में कथित अनियमितताओं के कारण युवाओं के भविष्य पर असर पड़ रहा है।
परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग
छात्र संगठनों ने NEET परीक्षा प्रणाली में सुधार और AIIMS की निगरानी में जवाबदेह परीक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग की है। इसके साथ ही राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी NTA की उच्चस्तरीय समीक्षा और उसकी कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने की मांग भी उठाई गई है।
आंदोलनकारियों ने NEET, SSC-CGL सहित प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक पर प्रभावी रोक लगाने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
शिक्षा नीति और शिक्षकों से जुड़े मुद्दे भी शामिल
15 सूत्रीय मांगपत्र में NEP 2020 की समीक्षा करने की मांग भी शामिल है। छात्र संगठनों का कहना है कि शिक्षा के निजीकरण, स्कूल बंद होने और ड्रॉपआउट जैसी समस्याओं पर सरकार को गंभीरता से काम करना चाहिए।
इसके अलावा 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से छूट देने की मांग भी की गई है।
खाली पद भरने और रोजगार की मांग
छात्र संगठनों ने केंद्र और राज्य के विभिन्न विभागों में वर्षों से खाली पड़े पदों पर नियमित भर्ती तत्काल शुरू करने की मांग की है। मध्यप्रदेश में सभी रिक्त पदों पर त्वरित भर्ती, स्थायी रोजगार योजना और रोजगार नहीं मिलने तक युवाओं को 11 हजार रुपये प्रतिमाह बेरोजगारी भत्ता देने की मांग भी मांगपत्र में शामिल है।
समान शिक्षा और OBC प्रतिनिधित्व का मुद्दा
मांगपत्र में देश में समान शिक्षा और समान फीस नीति लागू करने की मांग की गई है। वहीं मध्यप्रदेश में OBC वर्ग को संख्या के अनुपात में विभिन्न क्षेत्रों में प्रतिनिधित्व देने की मांग भी उठाई गई है।
छात्राओं की सुरक्षा, उनके साथ शोषण और अन्याय की घटनाओं पर रोक लगाने तथा सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग भी आंदोलनकारियों ने रखी है।
छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग
छात्र संगठनों ने धार्मिक शिक्षा के स्थान पर वैज्ञानिक और संवैधानिक मूल्यों पर आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने की मांग की है। इसके साथ ही विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव फिर से बहाल करने की मांग भी 15 सूत्रीय मांगपत्र में शामिल है।
कोचिंग संस्थानों पर कार्रवाई की मांग
इंदौर सहित विभिन्न शहरों में शिक्षा संस्थानों और कोचिंग सेंटरों द्वारा छात्रों से कथित तौर पर अत्यधिक फीस वसूली और अन्य अनियमितताओं पर रोक लगाने की मांग भी की गई है।
इसके अलावा सेना के जवानों पर कथित हमलों के विरोध में कार्रवाई की मांग भी आंदोलनकारियों ने उठाई है।
EVM समीक्षा की मांग भी शामिल
छात्र संगठनों के 15 सूत्रीय मांगपत्र में चुनाव प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता के लिए EVM व्यवस्था की समीक्षा और आवश्यक सुधार की मांग भी शामिल है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि उनकी मांगें केवल छात्रों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शिक्षा, रोजगार, परीक्षा व्यवस्था और युवाओं के भविष्य से जुड़े व्यापक मुद्दों को सामने रखती हैं। अब देखना होगा कि सरकार इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है और आंदोलन को लेकर आगे क्या रणनीति सामने आती है।