भोपाल। मध्यप्रदेश में समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी के लिए 1 फरवरी से रजिस्ट्रेशन शुरू होंगे। किसान 25 फरवरी तक रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे। रजिस्ट्रेशन की पूरी प्रोसेस ऑनलाइन होगी। किसान किस सेंटर पर अपनी उपज बेचना चाहते हैं, किस तारीख को उपज लेकर जाएंगे, यह तय करने की सुविधा किसानों को दी गई है। किसान रजिस्ट्रेशन के समय इन दोनों विकल्पों का इस्तेमाल कर सकते हैं। कियोस्क, लोक सेवा केंद्र पर रजिस्ट्रेशन की शुल्क भी शासन ने तय कर दी है। 50 रुपए फीस इसके लिए तय की गई है।
जानिए, पूरी प्रक्रिया-
सबसे पहले जानिये कहां करा सकते हैं रजिस्ट्रेशन-
एमपी ऑनलाइन कियोस्क, कॉमन सर्विस सेंटर, लोक सेवा केंद्र और प्राइवेट साइबर कैफे पर रजिस्ट्रेशन कराए जा सकते हैं। यहां किसानों को प्रति रजिस्ट्रेशन की फीस 50 रुपए चुकाना होगी।
ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, तहसील कार्यालय, सहकारी समितियों एवं विपणन संस्थाओं द्वारा संचालित पंजीयन केंद्र और एमपी किसान एप पर नि:शुल्क रजिस्ट्रेशन होंगे।
पहले और अब यह है प्रोसेस-
पहले किसान को फसल बेचने के लिए मोबाइल पर मैसेज मिलता था। जिसमें तारीख लिखी होती थी, उसी दिन किसान गेहूं लेकर सेंटर पर जा सकते थे। इससे कई बार किसान परेशान भी होते थे। नई व्यवस्था में किसान खुद ही दिन, टाइम और सेंटर तय कर सकेंगे।
रजिस्ट्रेशन में समस्याएं आए तो ये करें-
किसान रजिस्ट्रेशन में आधार से लिंक मोबाइल नंबर पर ओटीपी प्राप्त न हुआ हो तो-
आधार डाटाबेस में वर्तमान मोबाइल नंबर दर्ज नहीं होने के कारण ओटीपी प्राप्त नहीं होगा। ऐसी स्थिति में वर्तमान चालू मोबाइल नंबर आधार केंद्र या पोस्ट ऑफिस में जाकर अपडेट करा लें। फिर रजिस्ट्रेशन हो जाएगा।
यदि आधार नंबर में सही मोबाइल नंबर दर्ज होने पर भी ओटीपी नहीं मिला तो एक बार फिर से प्रोसेसे कर लें। हो सकता है कि मोबाइल नेटवर्क का इश्यू हो।
रकबे में अंतर हो और रजिस्ट्रेशन नहीं हो रहा हो तो-
एमपी किसान एप में जाकर दावा-आपत्ति का विकल्प चुन लें। इसमें सही फसल, रकबा और सिंचित-असिचिंत रकबे की स्थिति फीड कर दें।
पटवारी, नायब तहसीलदार, तहसीलदार से संपर्क करके समस्या दूर सकते हैं।
गिरदावरी में संशोधन के बाद ही रजिस्ट्रेशन हो सकेगा।
मूल भूमि-स्वामी की मृत्यु होने पर फसल का रजिस्ट्रेशन नहीं हो रहा तो-
खातेदार की मृत्यु होने पर वैध वारिस या उत्तराधिकारी के नाम से भूमि का नामांकरण होने पर ही वारिस के नाम से रजिस्ट्रेशन हो सकेगा।
शामिलाती भू-स्वामी होने पर रजिस्ट्रेशन किस प्रकार से किया जा सकेगा-
सभी हिस्सेदार अपने-अपने हिस्से में आने वाली भूमि पर बोई गई फसल का रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे।
किसान की भूमि एक से अधिक जिले या गांव में होने पर रजिस्ट्रेशन कैसे हो सकेगा-
यदि किसान की भूमि एक ही जिले के अन्य गांवों में है तो रजिस्ट्रेशन में दूसरे गांव की फसल के रकबे जोड़े जा सकेंगे।
यदि किसान की भूमि किसी अन्य जिले में है तो किसान को अपनी समग्र सदस्य आईडी एवं आधार का उपयोग करते हुए दूसरे जिले में रजिस्ट्रेशन कराना होगा।
गेहूं बेचने के बाद किसान के किन बैंक अकाउंट में भुगतान होगा-
किसान के आधार से लिंक बैंक खाते में ही भुगतान किया जाएगा। वहीं, रजिस्ट्रेशन के दौरान लिए गए बैंक अकाउंट में विशेष परिस्थितियों में ही भुगतान की कार्रवाई की जाएगी।
यदि किसान अपने मोबाइल से रजिस्ट्रेशन नहीं कर पा रहे हैं तो अन्य विकल्प-
सहकारी समिति एवं सहकारी विपणन संस्था द्वारा संचालित पंजीयन केंद्रों एवं एमपी ऑनलाइन कियोस्क या कॉमन सर्विस सेंटर पर रजिस्ट्रेशन कराए जा सकेंगे।
सिकमी, बंटाईदार, कोटवार एवं वन पट्टाधारी किसान के रजिस्ट्रेशन-
इस प्रकार के किसानों को सहकारी समिति एवं सहकारी विपणन संस्था स्तर पर स्थापित सेंटरों पर रजिस्ट्रेशन करना होगा।
किसान द्वारा दर्ज कराए गए नाम, भू-अभिलेख डाटा में दर्ज नाम में अंतर होने पर-
किसान द्वारा दर्ज कराया गया नाम आधार से भिन्न है तो किसान को आधार केंद्र या पोस्ट ऑफिस में जाकर आधार में नाम संशोधित करना होगा।
यदि किसान का नाम भू-अभिलेख से अलग है तो किसान को राजस्व अधिकारी से संपर्क कर भू-अभिलेख में नाम संशोधित करना होगा।
जरूरी दस्तावेज-
पंजीयन कराते समय किसानों को कुछ दस्तावेज रखने होंगे। जमीन की किताब, आधार कार्ड, बैंक अकाउंट की पासबुक। बैंक अकाउंट से आधार कार्ड लिंक होना चाहिए। यह अति महत्वपूर्ण है। अगर खाते से आधार कार्ड लिंक नहीं है, तो भुगतान अटक सकता है। जिन किसानों के खाते और आधार लिंक ना हों, वह यह काम करा लें। किसान का पंजीयन उसी स्थिति में होगा, जब भू-अभिलेख में दर्ज खाते, खसरा, आधार कार्ड का मिलान हो, तभी किसान पंजीयन हो सकेगा। विसंगति होने पर सुधार कार्य तहसील कार्यालय से होगा