भवानीमंडी। पिछले दिनों में नवजीवन हॉस्पिटल में एक बच्चे के साथ की गई लापरवाही से बच्चे की मौत का मामला सामने आया था। जिसमे आशीष पारेता ने न्याय के लिए कलेक्टर भारती दीक्षित से लिखित में गुहार लगाई थी। उस मामले में कलेक्टर द्वारा जल्द से जल्द मामले को संज्ञान में लेते हुए एक जिला चिकित्सा कमेटी बिठाई थी जिसमे पूरी जांच करने के बाद नवजीवन हॉस्पिटल भवानीमंडी के मैनेजमेंट पर बच्चे के साथ हुई लापरवाही से ही बच्चे की मौत का कारण माना है इस आधार पर हॉस्पिटल पर कार्रवाई की जायेगी।
नवजीवन हॉस्पिटल के मिस्ट्री की हिस्ट्री का खुला राज-
बच्चे की मौत के मामले मे 28 जनवरी को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन शाखा भवानीमंडी द्वारा दोपहर 3 बजे बिना मिडिया को सूचित किये बिना ही आपातकालीन बैठक बुलाई थी और चिकित्सकों ने एक स्टेटमेंट तैयार किया था जिसमे बच्चे की मौत कारण एक्यूड इंफेक्टिव हिपेटाइटिस विथ एकेलकुलस कोलीसिस्टाइटिस बताया गया था। आपको बता दे की उस बैठक में भामाशाह डॉक्टर जे के अरोड़ा साहब भी मौजूद थे। लेकिन सूत्रों की माने तो अपनी ही मिस्ट्री की हिस्ट्री के जाल मे फंसी चिकित्सक की कमेटी, बंद कमरे के अंदर यदि बैठक में बैठे हुए सभी डॉक्टर सही निर्णय ले सकते थे। लेकिन बच्चे की मौत कारण एक बीमारी से जोड़कर पल्ला झाड लिया। आखिर उस बंद कमरे मे ऐसा क्या हुआ था जिससे सारे बेठक में बैठे चिकित्सक को झूठ का सहारा लेना पड़ा।
नवजीवन हॉस्पिटल की लापरवाही और 7 साल का बच्चा हमेशा के लिए खामोश-
मामला 25 जनवरी 2023 का है बच्चे का पिता अपने बच्चे को हंसते खेलते व बोलते हुए बच्चे को हल्की सी तबियत बिगड़ने पर शहर के बीचो बिच स्थित एक निजी नवजीवन हॉस्पिटल पर एक विश्वास के तौर अपने बच्चे का इलाज कराने लाता है जहां डॉक्टर शैलेन्द्र पाटीदार नहीं मिलते है। जिनको दिखाने के लिए अपने बच्चे को लाता है जब डॉक्टर नहीं मिलते है तो वहां का मैनेजमेंट बच्चे को भर्ती कर लेते हें और कहते रहते हें की हमारी डॉक्टर से बात चल रही है वो अभी आ जायेंगे और बिना एमबीबीएस डॉक्टर के हाथो बच्चे का इलाज चालू रहता है। जब आशीष पारेता कहता है की मेरी डॉक्टर से बात कराइये तो वहां का मैनेजमेंट कहता है कि डॉक्टर साहब ने हमें फोन लगाने से मना किया है और कह कर गए है कि में शादी में जा रहा हूँ मेरे फोन मत लगाना फिर जब बच्चे की हालत गंभीर हुई तो उस लापरवाह डॉ ने कहा कि बच्चे को आगे लेकर जाओ। फिर बच्चे का पिता आशीष पारेता अपने बच्चे को लेकर मेट्रो हॉस्पिटल पंहुचता है। उस हॉस्पिटल में डॉ गोरव जैन तुरंत बच्चे को देखता है और 1.50 घंटे मे जो जांचे नवजीवन हॉस्पिटल में नहीं होती है वो जांचे कर बच्चे की हालत गंभीर देखते हुए आगे ले जाने की बात कहता है और कहता है कि बच्चे हालत इतनी ख़राब नहीं है तो आपको एम्बुलेंस की आवश्यकता नहीं है फिर तुरंत आशीष अपने मासूम बच्चे को कोटा ले जाता है लेकिन रास्ते मे बच्चे की गोद मे वो आख़री शब्द पापा मुझे बचा लो कहता हुआ अपना दम तोड़ देता है।