नीमच। शहर के बंगला व बगीचा क्षेत्रों में निवासरत नागरिक 1980 के दशक से चली आ रही समस्या का स्थाई समाधान चाहते हैं। बंगला-बगीचा समस्या का शत-प्रतिशत समाधान नहीं होने से नागरिकों को नारकीय जीवन जीने को मजबूर होना पड़ रहा है। उन्हें ना तो मकान निर्माण की अनुमतियां मिल रही है और ना ही योजनाओं का लाभ मिल पा रहा है। बंगला-बगीचा क्षेत्रों में निवासरत लोगों को बैंक भी लोन नहीं देती है।
नागरिकों का कहना है कि शिवराज सरकार ने समस्या का अधूरा समाधान किया है। चुनाव आते ही जनप्रतिनिधियों व राजनीतिक पार्टियों द्वारा समस्या का स्थाई समाधान कराने का आश्वासन दिया जाता है। लेकिन चुनाव निपटते ही जनप्रतिनिधि फिर जनता की समस्या को पांच सालों के लिए भूल जाते हैं। सरकार को व्यवस्थापन बोर्ड के जटिल नियमों को सरल कर व लीज रेंट सहित अन्य करों को कम कर जनता को राहत देनी चाहिए।
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बंगला-बगीचा क्षेत्र में निवासरतों की पीड़ा-
‘शहर के बंगला-बगीचा क्षेत्रों में करीब 50 हजार से अधिक नागरिक निवासरत है। सभी बंगलावासी चाहते है कि समस्या का स्थाई समाधान हो। सरकार द्वारा 2017 में बनाए गए व्यवस्थापन के जटिल नियमों में बदलाव हो। व्यवस्थापन बोर्ड द्वारा भी नागरिकों से कई तरह के दस्तावेजों की मांग की जाती है। - राकेश सुराह, बंगलावासी
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‘सरकार द्वारा बनाए गए व्यवस्थापन बोर्ड तक 4 सालों की अवधि में सिर्फ 2 हजार आवेदन ही पहुंचे हैं। इनमें से भी कई आवेदकों को अब तक व्यवस्थापन का इंतजार है। सरकार के जटिल नियमों के चलते नागरिक इस समाधान को ही समस्या मान बैठे हैं। प्रदेश की शिवराज सरकार को पुनः समस्या पर ध्यान देकर जनता के हित में नियम बनाने चाहिए।- गोविंद कुमार, बंगलावासी