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May 27, 2023, 11:40 am
KHABAR : निर्मला मेड़ा लोक अधिकार केन्द्र से जुड़कर कर रही है महिलाओ के अधिकारों की रक्षा व  लैंगिंग समानता के लिए समाज कल्याण का कार्य, पढ़े खबर 

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झाबुआ। यह कहानी मध्यप्रदेश डे-राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन झाबुआ के अंतर्गत पेटलावद विकासखंड के नारी शक्ति संकुल संगठन पेटलावद के ग्राम बरडीया के अम्बे माँ स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष निर्मला मेड़ा की है। निर्मला की शादी बचपन में कम उम्र में ही बरडीया गाँव के नाथू मैडा से हुई, ससुराल में परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी इसलिए निर्मला भी अपने पति के साथ घर खर्च चलाने के लिए मजदूरी का कार्य करती थी और दोनो मिलकर परिवार का भरण-पोषण करते थे और निर्मला को स्थानीय क्षेत्र में काम नहीं मिलने पर पलायन कर मजदूरी का कार्य भी करना पडता था, लेकिन बहुत बार मजदूरी नहीं मिलने पर निर्मला खाली हाथ घर आती थी तो उनका पति मारपीट करता था और झगड़ा करता था। इस तरह से निर्मला आर्थिक तंगी व मानसिक पीड़ा में जीवन यापन कर रही थी। लेकिन शादी के कुछ वर्षाे बाद सन् 2018 में निर्मला के पारिवारिक जीवन में बहुत परेशानी हुई, निर्मला के पति ने निर्मला और अपने परिवार से झगड़ा करके निर्मला को छोड़कर दूसरी महिला से शादी कर ली और घर छोड़कर चला गया, इस हादसे से निर्मला को गहरा मानसिक आघात पहुंचा और अब पुरे परिवार एवं बच्चों की जवाबदारी निर्मला पर आ गयी लेकिन निर्मला ने हार नहीं मानी और पूरी हिम्मत के साथ इस जिम्मेदारी को वहन करने की ठानी और घर खर्च एवं परिवार को संभालने का जिम्मा उठाया। निर्मला को आजीविका मिशन के अंतर्गत बन रहे स्व-सहायता समूह के बारे में जानकारी मिली तब निर्मला ने आजीविका मिशन के कर्मचारी से समूह के बारे में पूरा पता किया और समूह से जुड़ने के फायदे के बारे में समझा और फिर अपने गाँव में स्व-सहायता समूह बनाने का निर्णय लिया और अपने गाँव की महिलाओ को समूह के महत्व और उपयोगिता के बारे में बताया और 10 महिलाओ के साथ मिलकर अम्बे माँ स्व-सहायता समूह का गठन किया निर्मला 10वी तक पढ़ी-लिखी एवं सक्रिय महिला थी इसलिए सभी समूह के सदस्यों ने मिलकर निर्मला को समूह का अध्यक्ष बनाया और अपने समूह में 30 रुपये प्रति सप्ताह बचत करना तय किया गया एवं अपना बचत खाता मध्यप्रदेश ग्रामीण बैंक में खुलवाया और समूह की बचत को बैंक में जमा करना शुरू किया और फिर समूह को आजीविका मिशन के तहत 10000 रुपये रिवॉल्विंग फण्ड की राशि अनुदान के रूप में मिली। निर्मला ने शुरू में बर्तन धोने एवं घर-घर जाकर खाना बनाने का काम किया फिर धीरे-धीरे निर्मला को नारी शक्ति संकुल संगठन के अंतर्गत समता सखी का काम मिला और समता सखी के धीरे कार्य से 3200 रुपये मासिक वेतन मिलने लगा और निर्मला अपनी आय से घर खर्च चलाने लगी। फिर कुछ समय बाद निर्मला ने भोपाल में राज्य स्तर प्रशिक्षण में जेंडर प्रशिक्षक के रूप में भाग लिया और फिर प्रशिक्षण के बाद संकुल संगठन में समता समन्वयक का कार्यभार ग्रहण किया और अब निर्मला का मासिक वेतन 7800 रुपये हो गया और धीरे-धीरे आय बढ़ने लगी और निर्मला की आर्थिक स्थिति में सुधार होने लगा। आज वर्तमान में निर्मला अपनी नौकरी एवं अन्य कार्याे से प्रतिमाह 10 हजार रुपये कमा रही है और अब परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से काफी बेहतर हो गई है। इस प्रकार निर्मला ने अपनी मेहनत एवं हिम्मत के साथ अपने परिवार को आर्थिक रूप से सक्षम बनाया है। शादी के बाद निर्मला का पति मारपीट और अत्याचार करता था, लेकिन निर्मला अकेले होने की वजह से अपनी आवाज नहीं उठाती थी, निर्मला समूह से जुड़ी फिर समूह की महिलाओं ने निर्मला को घरेलू हिंसा एवं उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने के लिए हिम्मत दी एवं निर्मला का साथ दिया और फिर निर्मला ने समूह की महिलाओं के साथ मिलकर पुलिस थाने में जाकर अपने पति के खिलाफ घरेलू हिंसा का केस दर्ज किया और पुलिस द्वारा कारवाई की गई। साथ ही अब निर्मला सामाजिक कार्याे में भी काफी सक्रिय हो गई है और समाज कल्याण के कार्यों में भी भागीदारी करती रही है। वर्तमान में निर्मला लोक अधिकार केन्द्र से जुड़कर संचालिका के पद पर रहकर महिलाओ के अधिकारों की रक्षा एवं लैंगिंग समानता के लिए समाज कल्याण का कार्य कर रही है। निर्मला ने अपनी कमाई से घर में एक स्कूटी ले ली है। अब निर्मला को मजदूरी करने नहीं जाना पड़ता है और निर्मला अपने बच्चों को भी अच्छे स्कूल में पढ़ा रही है। “ निर्मला अपनी कहानी सुनाते हुए कहती है कि समूह से जुड़कर जिन्दगी जीने की नई राह मिली और समूह की एकता एवं हौसले के कारण ही आज आत्मनिर्भर होकर समाज एवं गाँव में अपनी एक पहचान बनाई है।
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