जीरन। प्रदेश सरकार के मुखिया डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर प्रदेश भर के नदी, तालाब कुओं का जल संवर्धन कर साफ सफाई के लिए एक विशेष अभियान पिछले सप्ताह भर से चल रहा है, जिसका समापन 16 जून को किया गया। शासन के निर्देशानुसार आयोजन को भव्य रूप से जनता के बीच मनाया जाना था, घाटों पर विशेष साफ सफाई के साथ ही घाट पर आरती, नगर में कलश यात्रा निकालना जैसे प्रमुख आयोजन किया जाना था। लेकिन लापरवाही की हद तो तब हो गई जब स्थानीय सीएमओ और जनप्रतिनिधियों की मिली भगत से इस आयोजन का ही बंटाधार कर दिया।
अभियान के तहत घाट पर आरती और विशेष साफ सफाई करना थी लेकिन समापन अवसर पर जिस घाट की साफ सफाई की गई वो उसकी पूरी सफाई अभियान के तीसरे दिन 7 जून को ही कर दी गई थी, महज फोटो सेशन करने और अभियान समाप्ति को कागजों पर उतारने के लिए कर्मचारी और अमला सती महादेव मंदिर के घाट पर बुलवाया गया। वहीं नगर में कलश यात्रा निकालना थी उस पर भी महज औपचारिकता निभाने के लिए प्रतापगढ दरवाजे से नगर परिषद कार्यालय तक कलश यात्रा निकाली गई। समापन कार्यक्रम में क्षेत्रीय विधायक दिलीप सिंह परिहार आ पहुंचे लेकिन नगर परिषद कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और कर्मचारियों के अलावा केवल कुछ बच्चे ही मौजूद थे कुर्सियां खाली दिखने से फजीहत न हो जाये इसलिए चौराहे पर मजदूरी की आस में बैठे मजदूरों को बुलाकर कुर्सियां भरवाई गई। आयोजन में हो रही लापरवाहियों को लेकर भाजपा पार्षद विनोद पाटीदार ने अपना आक्रोश व्यक्त करते हुए सीएमओ को खूब खरी खोटी सुनाई। वही कार्यक्रम में लापरवाही इतनी ज्यादा थी कि कर्मचारियों को ही सुध नहीं पढ़ रही थी।
बताया जा रहा है अभियान के तहत रंगोली, चित्रकला और निबन्ध प्रतियोगिता में भाग लेनी वाली विधि पिता विजय पाटीदार ने प्रथम स्थान प्राप्त किया था। जिसे मंच पर पुरुस्कार स्वरूप प्रमाण पत्र और ट्राफी दी गई थी लेकिन बाद में कर्मचारियों ने छात्रा से पुरुस्कार वाली ट्राफी वापस ले ली। जिसको लेकर नगर परिषद के अधिकारी कर्मचारी और जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े होते है। शासन की योजनाओं का मख़ौल उड़ाने वाले ऐसे लोगो पर क्या कार्यवाही होती है सरकार कितना एक्शन लेती है यह देखना होगा।