नीमच। अल्ट्राटेक सीमेंट समूह के अंतर्गत सीमेंट फैक्ट्रियों में कार्यरत कर्मचारियों को नियमों के विपरित 58 रिटायर्ड किया जा रहा है, जबकि कानून निजी संस्थानों में सेवानिवृत्ती की उम्र 60 वर्ष सरकार ने तय कर रखी है। मुझे भी दो साल पहले रिटायर्ड कर दिया गया, जबकि अल्ट्राटेक समूह के एमडी की उम्र 67 वर्ष हो चुकी है, फिर भी उन्हें तीसरी बार सेवा विस्तार मिल रहा है।
यह पत्र विक्रम सीमेंट संयत्र खोर से सेवानिवृत्त कर्मचारी महेंद्रसिंह पिता हरिसिंह लुणावत निवासी नयागांव ने आदित्य बिड़ला ग्रुप के चेयरमेन कुमार मंगलम बिड़ला को लिखा है, जिसमें बताया कि विक्रम सीमेंट संयत्र खोर की स्थापना के समय मेरे परिवार की करीब 21 बीघा कृषि भूमि अधिग्रहित की गई थी। जमीन के अधिग्रहण के बदले मेरे परिवार के सदस्य को नौकरी ऑफर की गई थी और मेरे परिवार की स्वीकृति पर मुझे नौकरी पर रखा गया था। महेंद्र सिंह ने पत्र में बताया कि मप्र में शासन ने शासकीय क्षेत्र में सेवानिवृत्ति की आयु 60 से 62 वर्ष तथा निजी क्षेत्र में 60 वर्ष कानूनन कर रखी है। महेंद्रसिंह ने बताया कि मैंने पूरे सेवाकाल में पूर्ण निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण से कार्य किया, लेकिन मुझे जबरन 60 वर्ष की आयु की जगह 58 वर्ष में ही सेवानिवृत्त कर दिया गया।
पत्र में विक्रम सीमेंट खोर से सेवानिवृत्त किए गए महेंद्रसिंह ने आदित्य बिड़ला ग्रुप के चेयरमेन कुमार मंगलम बिड़ला को बताया कि बड़े दुख और क्षोभ का विषय है कि, एक ओर आपके अल्ट्राटेक सीमेंट समूह में 20-25 करोड़ रूपए की सालाना तनख्वाह व अन्य लाभ प्राप्त करने वाले एमडी केसी झंवर, एसके गुप्ता जैसे 67 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को 3-3 बार सेवा विस्तार दिया जा रहा है, वहीं मुझ जैसे मात्र 10 लाख रुपए सालाना तनख्वाह वाले गरीब कर्मचारी को 2 वर्ष पूर्व सेवा निवृत्ति दे दी गई है जो कि शासन द्वारा बनाए गए कानून के विपरित कृत्य है, जिस व्यक्ति ने उत्पादक और मौके पर स्थित अपनी 21 बीघा जमीन को देकर आपके उद्योग लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, उसके यह घोर अन्याय है ।
पत्र में महेंद्रसिंह ने कहा कि मेरे कई मित्रों एवं शुभचिंतकों ने आपके संस्थान के विरुद्ध माननीय उच्च न्यायालय में पिटीशन दायर करने की सलाह दी, लेकिन मैंने इस विकल्प की बजाय सीधे आपसे अनुरोध करने का निर्णय लिया है क्योंकि मेरी उपजाऊ व मौके की बेशकीमती जमीन आपकी फैक्ट्री लगाने के लिए दी है, जिस पर मेरी आने वाली कई पीढ़िया भी खेती कर गुजारा करती, पर आपके संस्थान को न केवल मानवीयता के नाते, बल्कि म.प्र. शासन के 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्ति देने के नियमानुसार भी मुझे 58 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्ति नहीं देना थी, बल्कि मेरे पुत्र को भी आपके संस्थान में कोई स्थाई रोजगार देना था । पत्र में महेंद्रसिंह ने मांग करते हुए कहा कि मुझे नियम विरुद्ध 2 वर्ष पूर्व सेवानिवृत्त करने पर 2 वर्ष की पूर्ण तनख्वाह व भत्तों का भुगतान करने के आदेश देने की कृपा करें।