चित्तौड़गढ़। आज विश्व सिकल सेल एनीमिया दिवस है। सिकल सेल एनीमिया पर जनजागरूकता लाने के लिये हर वर्ष 19 जून को विश्व सिकल सेल एनीमिया दिवस मनाया जाता है। सीएमएचओ डॉ ताराचन्द गुप्ता ने बताया कि जिले में विश्व सिकल सेल एनीमिया दिवस पर जिला मुख्यालय सहित अधिसूचित जनजाति क्षेत्र में जागरूकता एवं क्षमतावर्द्धन कार्यक्रम आयोजित किये जाएगें।
सीएमएचओ ने बताया कि सिकल सेल एनीमिया एक आनुवांशिक बीमारी है जो माता-पिता से बच्चों में पहुंचती है तथा लाल रक्त कोशिकाओं को प्रभावित करती है। इस रोग में लाल रक्त कोशिकाओं का आकार असामान्य रूप से अर्धचंद्राकार हो जाता है। सिकल लाल रक्त कोशिकाएं कठोर और चिपचिपी कोशिकाएं होती हैं। वे छोटी रक्त वाहिकाओं में फंस जाते हैं और रक्त के प्रवाह को धीमा या अवरुद्ध कर देते हैं। सामान्य लाल रक्त कोशिकाएं 120 दिनों तक जीवित रह सकती हैं लेकिन सिकल कोशिकाएं लगभग 10 से 20 दिनों तक जीवित रहती हैं।
यह है मुख्य लक्षण
इस बीमारी में शरीर के अंगो में दर्द, शारीरिक विकास में कमी एवं खून की कमी मुख्य लक्षण हैं। यह बीमारी फेफड़ों, हृदय, गुर्दे, आंखों, हड्डियों और मस्तिष्क जैसे कई अंगों को भी प्रभावित करती है। यह हृदय, फेफड़े, गुर्दे और अन्य अंगों से संबंधित दर्द और अन्य गंभीर जटिलताओं (स्वास्थ्य समस्याओं) का कारण बन सकता है, क्योंकि अंगों तक पर्याप्त रक्त और ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती है।
जनजातिय क्षेत्रों में अधिक पाया जाता है सिकल सेल रोग
उपमुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (स्वा.) डॉ मुकेश विजयवर्गीय ने बताया कि यह बीमारी भारत की जनजातीय आबादी में अधिक पाई जाती है, लेकिन गैर-आदिवासियों में भी यह रोग मिलता है। जनजातीय आबादी में जन्म लेने वाले 86 में से लगभग 1 को सिकल सेल रोग है, जो मध्य, पश्चिमी और दक्षिणी भारत में अधिक है। गुजरात, राजस्थान, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, उत्तर प्रदेश और असम सिकल सेल रोग के अधिक प्रसार वाले राज्य है।
सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन का क्रियान्वयन
सीएमएचओ ने बताया कि यह रोग आनुवांशिक है, जो परिवारों में जीन्स द्वारा आता है, अतः इसकी रोकथाम का सबसे प्रभावी उपाय बीमारी को अगली पीढ़ी तक जाने से रोकना है। इसके लिये सिकल सेल कैरियर लोगों की पहचान कर उनका उपचार करने के लिये भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिषन प्रारम्भ किया गया है। सेल रोग के उपचार में आमतोर पर लक्षणों से राहत देने और जटिलताओं को रोकने का प्रयास होता है। इस बीमारी को अगली पीड़ी तक जाने से रोकने के लिये विवाह से पहले सिकल सेल केरीयर की पहचान की जानी चाहिए। माता-पिता की जागरूकता बढ़ाने और उनकी भागीदारी के साथ हस्तक्षेप से इस बीमारी प्रभावित लोग लम्बे समय तक जीवित रहते है और युवावस्था और अधेड़ उम्र तक जीवित रहते है। चित्तौड़गढ़ जिले में बड़ीसादड़ी उपखण्ड के जनजाति उपयोजना क्षेत्र की अधिसूचित 8 ग्राम पंचायतों में 0 से 40 वर्ष की उम्र के लोगों की सिकल सेल एनीमिया की स्क्रीनिगं का कार्य किया गया है तथा शीघ्र ही सभी लाभार्थियों को जेनेटिकक काउंसिलिगं आईडेन्टिफिकेशन कार्ड वितरित किये जाएगें।