चित्तौड़गढ़। महिलाए है तो इस सुन्दर संसार की कल्पना है।
महिलाए है तो जीवन जीने की हैं परिकलपना।
महिलाए वो धन्य है जिसने बेटी को इस दुनिया मे लाया ।
संसार समाज को सफल बनाने मे अपना रोल निभाया ।।
महिलाए के दिल सागर के समान विशाल है।
महिलाए के मन आईना के समान साफ है।
महिलाओं की वाणी सुन्दर समाज की निर्माण, अद्भुत परिभाषा है ।
महिलाओं के हृदय परिवार की बंधन की खास रस्सा है।
महिलाओं के उत्तम विचार सुन्दर संसार की अमूल्य धरोहर है।
महिलाओं के कोमल स्वभाव माता पिता की गरिमा है।
महिलाए है तो एक सुन्दर समाज परिवार की संरचना है ।
महिलाए सचमुच मे जीवन को बेमिसाल बनाने का सुगम रास्ता है।
महिलाए इस धरोहर रूपी धरती पर अनमोल उपहार है।
महिलाए नदी मे चलते नाव की पतवार की समान ढाल है।
महिलाए गुणो मे श्रेष्ठ बातो मे तेज कामकाज में बेस्ट और नाज नखरे पे सर्वश्रेष्ठ है ।
रचनाकार - भुवनेश्वर प्रशाद साहू, चित्तौड़गढ़