चित्तौड़गढ़। स्थानीय खातर महल में श्रमण संघीय महासाध्वी प्रेक्षा श्री जी ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि मुंह से वाणी बोलते समय शब्दों का बड़ा महत्व होता है, केसी भी परिस्थिति हो बोलते समय वाणी को मधुर सकारात्मक भावनाओं के साथ उपयोग में लाना चाहिए।
जो सुनने वाले के तन -मन दोनों को पसंद आए, अच्छी वाणी ही समधुर संबंध बनाती है। इन दिनों बढ़ रही आत्महत्याओं की घटनाओं पर चिंता व्यक्त करते हुए साध्वी जी ने कहा कि आत्महत्या कर लेना किसी भी समस्या का समाधान नहीं है, विपरीत परिस्थितियों में धैर्य के साथ समस्याओं को चुनौती के साथ लड़ने वाला ही वीर कहलाता है।
धर्म सभा में इन दिनों चल रहे नैतिक ज्ञान व धर्म संस्कार शिविर में उपस्थित शिविरार्थियों को महासाध्वी जी ने जीवन में कभी भी आत्महत्या न करने की सलाह देते हुए आत्महत्या न करने के संकल्प दिलाए।