भोपाल। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय बागसेवनिया भोपाल परिसर में 21 दिवसीय संस्कृत नाटक पर आयोजित कार्यशाला का समापन रविवार को संस्कृत नाटक मृत्युवर्षम के मंचन के साथ किया गया। महाभारत पर आधारित नाटक में दुर्याेधन का संवाद- वैरं विग्रहकथाः च क्यं च नष्टाः अर्थात युद्ध के साथ मैं भी समाप्त हो गया और हमारा शत्रुत्व भी समाप्त हो गया। ढाई हजार साल पहले संस्कृत भाषा में लिखे गए उरुभंग नाम के नाटक पर यह नाटक आधारित है। 40 मिनट के इस नाटक में विभिन्न राज्यों के संस्कृति विवि से आए लगभग 50 स्टूडेंट ने पार्टिसिपेट किया। समापन सत्र की अध्यक्षता भोपाल परिसर के निदेशक प्रो. रमाकांत पांडेय ने की।।
इस अवसर पर केरल के प्रसिद्ध नाट्य निर्देशक सुरेश बाबू के मार्गदर्शन में संस्कृत नाट्य मुक्तिवर्षम की प्रस्तुति हुई। उरुभंगम तथा वेणीसंहराम इन दोनों रूपकों का संयोजन करके इस नाटक का निर्माण किया गया। यह प्रस्तुति कार्यशाला के प्रतिभागियों द्वारा प्रस्तुत की गई ।
उल्लेखनीय है कि 21 दिवसीय कार्यशाला कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी के संरक्षण में आयोजित हुई। कार्यशाला में प्रशिक्षण देने के लिए देश के रंगमंच के प्रख्यात विद्वान कलाकारों का आगमन हुआ, जिनमें प्रमुख रूप से प्रो.योगेश सोमन निदेशक रंगमंच कला अकादमी मुंबई विश्वविद्यालय, प्रख्यात साहित्यकार एवं नाट्य शास्त्र के मर्मज्ञ राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान के पूर्व कुलपति प्रो. राधावल्लभ त्रिपाठी, नृत्यांगना ऐश्वर्या हरीश, कथक नृत्य के विद्वान पद्मश्री पुरु दाधीच प्रमुख थे।
समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में महर्षि पाणिनी संस्कृत वैदिक विश्वविद्यालय उज्जैन के कुलपति प्रो. सी जी विजय कुमार मेनन ,विशिष्ट अतिथि केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली, कुलसचिव प्रो. रा.गा.मुरली कृष्ण एवं सारस्वत अतिथि प्रो. सुरेश कुमार जैन उपस्थित रहे।
मुख्य अतिथि प्रो. सी जी विजय कुमार मेनन ने अपने उद्बोधन में कहा कि वर्तमान समय में संस्कृत रंगभूमि को लेकर कार्यशाला आयोजित करना यह निश्चित ही एक अलग उपक्रम है। विशिष्ट अतिथि प्रो. रा.गा. मुरली कृष्ण ने बताया कि संस्कृत नाटकों के प्रयोग देश विदेश में हो इसलिये केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय सदैव आवश्यक निधि तथा सामग्री उपलब्ध कराएगा। सारस्वत अतिथि प्रो. सुरेश जैन ने अपने वक्तव्य में कहा, भारतीय साहित्य में परिष्कार के लिए संस्कृत नाटक की आज भी आवश्यकता है।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रो. रमाकांत पांडे ने कहा कि नाट्यशास्त्र अध्ययन अनुसंधान केंद्र भोपाल परिसर में नाट्य प्रशिक्षण का काम निरंतर करता रहेगा और संस्कृत रंगभूमि पर नए-नए प्रयोग होते रहेंगे ।
नाटक में प्रस्तुति देने वाले कलाकार उत्तराखंड, जम्मू, हिमाचल, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, दिल्ली जैसे राज्यों के संस्कृत विश्वविद्यालय के स्टूडेंट हैं, जिन्होंने कार्यशाला में नाटक सीखा और प्रस्तुति दी। कार्यशाला के समन्वयक डॉ. प्रसाद भिड़े एवं कार्यक्रम का संचालन डॉ. आयुष दीक्षित ने किया।