सिंगोली । तहसील क्षेत्र में जल संवर्धन के बहाने धड़ल्ले से चल रहे मिट्टी के अवैध कारोबार के चलते नया पुराना बांध के टूटने का खतरा बढ़ गया है। विगत 21 जून को राजपुरा पंचायत की ओर से भी प्रशासनिक अधिकारियों अवगत करा दिया गया है।
बताया जाता है कि विगत माह शासन की ओर से जल संवर्धन कार्यक्रम के तहत नदी, तालाब और जलाशयों की सफाई का आदेश दिया गया था। इसी आदेश के संदर्भ में किसानों को राहत देते हुए नीमच कलेक्टर ने जलाशयों से ऊपरी उपजाऊ मिट्टी ले जाने की छूट दी थी, लेकिन मिट्टी खनन माफियाओं ने आदेश को कमाई का जरिया बनाते हुए सिंगोली क्षेत्र के प्राचीन नया पुराना बांध को क्षतिग्रस्त कर दिया है।
बताया जाता है कि बांध में चल रही जेसीबी मशीनों और ट्रैक्टर से बांध की तलहटी और पाल की पिचिंग को भारी नुकसान पहुंच रहा है। बांध टूटने की आशंका के चलते ग्राम पंचायत ने भी वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत करा दिया, लेकिन अब तक खनन माफियाओं को वहां से खदेड़ा नहीं जा सका है। जबकि गिद्ध की तरह जमे खनन माफियाओं के बीच मिट्टी खनन को लेकर प्रतिदिन विवाद की स्थिति भी बन रही है।
पता चला है कि खनन माफियाओं द्वारा किसान प्रति ट्रैक्टर साढ़े 700 से साढ़े 900 सो रुपए तक वसूले जा रहे हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक किसान ने बताया कि उनसे ढाई सौ रुपए जेसीबी शुल्क, 300 से 500 रुपए ट्रैक्टर ट्राली, और 200 रुपए अधिकारियों के नाम से वसूले जा रहे हैं।
अब शासन ने जल संवर्धन के नाम पर भले ही किसान को राहत देने का प्रयास किया हो, लेकिन खनन माफियाओं ने इसे कारोबार का रूप देकर सरकार के मंसूबे पर पानी फेर दिया है।