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June 25, 2024, 7:33 pm
NEWS : षड दुर्गुणों को त्यागने पर इंसान और अपनाने पर इंसान भी बन जाता हैं शैतान - स्वामी सुदर्शनाचार्य, श्याम बाबा के स्वरूप में ठाकुर के हुए दर्शन, पढे़ रेखा खाबिया की खबर 

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चित्तौड़गढ़। व्यंकटेश बालाजी दिव्य धाम अलवर के स्वामी सुदर्शनाचार्य ने कहा कि सृष्टि में तीन शक्तियां विद्यमान हैं जिनमें भगवान, इंसान और शैतान माने गए हैं। परमात्मा में षड गुण होने से वे ऐश्वर्य से संपन्न है तथा उनमें किसी भी प्रकार का कोई दोष नहीं माना गया। उन्होंने कहा कि षड दुर्गुण को त्यागने से व्यक्ति इंसान बन जाता हैं और अपनाने से शैतान बन जाता हैं। उन्होंने बताया कि षड गुणों में काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद और मत्सर व्यक्ति को शैतान बनाते हैं, जबकि दुर्गुणों को स्वीकारना ही इंसान की पहचान हैं। स्वामी सुदर्शनाचार्य मंगलवार को 19 वें कल्याण महाकुंभ के उपलक्ष्य में सिद्धाश्रम तीर्थ के नेमीशारण्य कथा मंडप में आयोजित श्रीमद नारदीय महापुराण की कथा का व्यासपीठ से रसामृतपान करा रहे थे। नारदीय महापुराण के प्रसंग में देवर्षि नारद ने सनकादिक ऋषियों से भगवती गंगा की उत्पत्ति के संबंध में पूछा तब उन्होंने एक प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि आसुया दोष के कारण राजा बाहू का सर्वनाश हो गया था, लेकिन देवर्षि नारद जैसे संत की कृपा से सर्वनाश के बाद भी अभ्युदय की संभावना बन गई। जिसके फलस्वरूप राजा बाहू की पत्नि के गर्भ से ओर्वत ऋषि के आशीर्वाद से सगर का जन्म हुआ, जबकि उनकी दूसरी पत्नि से 60 हजार पुत्र पैदा हुए। सनक जी महाराज देवर्षि से कहते हैं कि चार चीजें अनर्थ के लिए पर्याप्त हैं यौवन, धन, स्वामित्व और मुर्खता इनमें से एक भी हो तो अनर्थ होने निश्चित हैं। सगर के 60 पुत्रों में ये चारों अवगुण मौजूद थे और वे जन्मजात मूर्ख भी थे। जिसके कारण यज्ञ के अश्व की रक्षार्थ पृथ्वी को खोते हुए कपिल मूनि आश्रम तक पहुंच गए जहां उन्होंने मूनि कपिल का अपमान किया। परिणाम स्वरूप ऋषि की क्रोधाग्नि से सभी जल कर भस्म हो गए, जबकि सगर के पुत्रों द्वारा खोदे गए गढ्डे के फलस्वरूप पृथ्वी का एक हिस्सा सागर बन गया। उन्होंने कहा कि ऋषियों का क्रोध भी समाज के लिए कष्टकारी होता हैं, लेकिन कभी कभी वरदान भी बन जाता हैं। कपिल मूनि के क्रोधित होने पर भी उन्होंने गंगा का आह्वान किया। जिसके फलस्वरूप भगवती गंगा प्रकट हो गई। राजा सगर की तीन पीढ़ियों में राजा भगीरथ के प्रयास से पतितपावनी गंगा जी का अवतरण हुआ, जो प्राणी मात्र के कल्याण और मोक्ष का सशक्त माध्यम बन चुकी हैं। कथा के प्रारंभ में स्वामी जी ने मंदिर परिसर में ठाकुर श्री के दर्शन कर पूजा अर्चना करते हुए कहा कि महाकुंभ के चतुर्थ दिवस कल्याण नगरी के राजाधिराज हारे के सहारे श्याम बाबा के स्वरूप में भक्तों को दर्शन देकर निहाल कर रहे हैं। उनका यह स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केन्द्र बना हुआ हैं।


श्याम बाबा के स्वरूप में ठाकुर के हुए दर्शन
कल्याण महाकुंभ के दौरान कल्याण नगरी के राजाधिराज ठाकुर श्री कल्लाजी का खाटूश्याम के रूप में मनोहारी श्रंगार भक्तों के लिए विशेष आकर्षण केन्द्र बना रहा। वागड़ क्षेत्र से आए ठाकुर जी के सेवकों ने अपने आराध्य के अनुपम दर्शन करते हुए कहा कि वास्तव में ठाकुरजी के ठाठ तो कल्याण नगरी में ही हैं। इस मौके पर ठाकुरजी को नानाविध प्रकार के मिष्ठान एवं चटपटे व्यंजनों का छप्पनभोग धराया गया। जिसमें श्रीनाथ जी को लगाए जाने वाले भोग की सामग्री के साथ ठाकुरजी का दिव्य दर्शन आनंदित करने वाला था। सतरंगी फूलों एवं फलों की झांकी के बीच ठाकुरजी की मनोहारी छवि का आकर्षण देखते ही बनता था। मंगला आरती से पूर्व ठाकुरजी का एकादश द्रव्यों से महारूद्राभिषेक किया गया।


नारदीय यज्ञशाला में विष्णु महायज्ञ हुआ प्रारंभ
कल्याण महाकुंभ के चतुर्थ दिवस मंगलवार से सिद्धाश्रम तीर्थ स्थित नारदीय यज्ञशाला में 51 कुण्डीय विष्णु महायज्ञ का शुभारंभ ऋग्वेद के अग्निसूक्त की ऋचाओं के गान के साथ अरणी मंथन कर अग्निदेव को प्रकट कर यज्ञ कुण्ड में स्थापित करने के साथ किया गया। प्रथम दिवस पर लगभग 450 यजमानों द्वारा गौघृत्य एवं शाकल्य की वैदिक मंत्रोच्चार के साथ देवताओं के नाम मंडप एवं स्थापित देवों की पूजा करते हुए द्वादश ओम नमरू भागवते वासुदेवाय का जाप करते हुए गौघृत्य एवं शाकल्य से आहूतियां देकर सर्वस्त्र खुशहाली एवं अच्छी वर्षा की कामना की। यज्ञ मंडप में प्रवेश से पूर्व पुरूष यजमानों द्वारा विधि विधान के साथ हेमान्द्री स्नान कर जनेऊ धारण करने के बाद सपत्निक एवं परिजनों के साथ यज्ञशाला में प्रविष्ट हुए। इस मौके पर स्वामी सुदर्शनाचार्य ने कहा कि यज्ञ ही साक्षात विष्णु का स्वरूप हैं तथा यज्ञ के पात्र और पदार्थ भी विष्णु रूप माने गए हैं। उन्होंने कहा कि सात्विक यज्ञ से ही परमात्मा प्रसन्न होते हैं, जबकि यज्ञ तीन प्रकार के माने गए हैं, जिसमें सात्विक, राजस, तामस शामिल हैं। सात्विक यज्ञ में गौघृत्य, जौ और तिल की आहूतियां दी जाती हैं। यज्ञ में किसी भी प्रकार की कमी से अनिष्ठ होने स्वभाविक हैं, जबकि धन की शुद्धि सात्विक यज्ञ से ही संभव हैं। बुधवार को विष्णु महायज्ञ में लगभग 350 यजमान युगल अपनी भागीदारी निभाएंगे।

मेरी सांस सांस के स्वामी कल्लाजी राठौड़ की जय के साथ खूब जमा अखिल भारतीय कवि सम्मेलन कल्याण महाकुंभ के तृतीय दिवस रात्रि में नेमीशारण्य कथा मंडप में आयोजित अखिल भारतीय विराट कवि सम्मेलन उस समय परवान चढ़ गया जब कवि सम्मेलन के सूत्रधार विनोद सोनी ने अपने ही अंदाज में अपने आराध्य की महिमा का बखान करते हुए कहा कि मेरी सांस सांस के स्वामी कल्लाजी राठौड़ की जय के साथ वातावरण को शौर्य से भर दिया। कांकरोली के कवि पं. गौरव पालीवाल ने अपनी रचना में व्यंगबाण परोसते हुए हंसो को दे रही सजा, कव्वो की चौपाल सुना कर वाह वाही लूटी। वहीं औरैया के कवि अजय अंजाम ने वीर रस से ओतप्रोत काव्य रचना के माध्यम से मेवाड़ी सूरज महाराणा प्रताप की महिमा का बखान करते हुए सिर कट कर गिर जाते थे यदि तो धड़ ही लड़ते रहते थे, ललितपुर के कवि पंकज पं. ने अनोखे अंदाज में अपनी रचना में क्षमा योग्य हो तो क्षमादान हम करें किन्तु शिशुपाल हो तो शीश काटना जरुरी हैं के माध्यम से समाज को एक नई सीख दी। बांसवाड़ा की रोहिणी पंड्या ने सनातन धर्म की महत्ता बताते हुए कहा कि परोपकार सेवा दया करुणा जिसमें सद्कर्म हैं, सबसे पावन पुनीत हमारा सनातन धर्म हैं, वहीं कल्याण नगरी की जया धनगर ने कल्लाजी की महिमा करते हुए अपनी रचना प्रस्तुत की। मंच संचालन करते हुए कवि शशिकांत यादव ने राजनैतिक कटाक्ष करते हुए शहजादे को धूल चटा दी चाय बेचने वाले ने सुनाकर खूब तालियां बटौरी। रिमझिम वर्षा के बीच भोपाल से आए संजय सिंह ने अपनी प्रसिद्ध रचना बाबूजी प्रस्तुत करते हुए किसके लिए इतना कमाते हो बाबू जी के माध्यम से जीवन को सही मायने में जीने का संदेश दिया। इस बीच इंदौर के प्रद्युम्न शर्मा ने परोपकार पर अपनी रचना प्रस्तुत करते हुए कहा कि परोपकार सेवा, दया और करूणा जिसमें सदकर्म हैं वहीं हमारा सनातन धर्म हैं। जयपुर के उमेश उत्साही ने अपने ही अंदाज में भारत के वर्तमान स्थिति का दृश्य प्रस्तुत करते हुए कहा कि मुझको आधा भारत दीक्षित और आधा शिक्षित दिखता हैं, कलयुग के प्रभाव में ग्रस्त परीक्षित दिखता हैं प्रस्तुत कर खूब वाह वाही लूटी। इसी दौर में बुधवार रात्रि को भक्ति शाम सांवरिया सेठ के नाम भजन संध्या में प्रसिद्ध भजन गायक गोकुल शर्मा एवं साथियों की प्रस्तुति होगी।

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