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December 13, 2024, 8:28 pm
BIG REPORT : नीमच-मंदसौर संसदीय क्षेत्र के सांसद सुधीर गुप्ता ने लोकसभा में पूछा प्रश्न, सूचना और प्रसारण एवं संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने दिया जवाब, बोले-  पायरेसी के खिलाफ सरकार उठ रही ठोस कदम, पढ़े खबर 

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मंदसौर। विश्व ऑडियो विज़ुअल और मनोरंजन शिखर सम्मेलन एक प्रमुख कार्यक्रम है जहाँ पेशेवर ऑडियो विज़ुअल उद्योग में रुझानों और नवाचारों पर चर्चा करते हैं। विषयों में अक्सर रिज़ॉल्यूशन, इमर्सिव ऑडियो और वर्चुअल रियलिटी जैसी तकनीकी प्रगति शामिल होती है। शिखर सम्मेलन में टिकाऊ उत्पादन, वैश्विक बाजार रणनीतियों और सामग्री के निर्माण पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के प्रभाव पर भी ध्यान केंद्रित किया जाता है। यह उद्योग में उभरती प्रतिभाओं और अनुभवी पेशेवरों दोनों के लिए मूल्यवान नेटवर्किंग अवसर प्रदान करता है। उक्त बात सांसद सुधीर गुप्ता द्वारा लोकसभा में पूछे गए प्रश्न के जवाब में सूचना और प्रसारण एवं संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने कही।

लोकसभा में सांसद गुप्ता ने वेव्स और पायरेसी को लेकर प्रश्न करते हुए कहाकि सरकार को पायरेसी विशेषकर टेलीग्राम जैसे प्लेटफार्मों के माध्यम से मीडिया और मनोरंजन उद्योग को व्यापक राजस्व हानि की जानकारी हैं और पायरेसी से संबंधित शिकायतों को दूर करने के लिए सरकार द्वारा कौन से तंत्र या प्रणालियां स्थापित की गई हैं और उनकी प्रभावशीलता क्या है। पिछले तीन वर्षों के दौरान पायरेसी से संबंधित प्राप्त शिकायतों की कुल संख्या और उनकी वर्तमान स्थिति सहित उन पर की गई कार्रवाई का ब्यौरा क्या है। सांसद गुप्ता ने कहा कि मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र में पायरेसी से निपटने के लिए सरकार द्वारा शुरू की गई मौजूदा पहलों, नीतियों और अधिनियमों क्या है। पायरेसी के खिलाफ सरकार द्वारा उठाए गए उठाए जा रहे है और दंडात्मक उपायों क्या है। क्या सरकार ने 2025 में वर्ल्ड ऑडियो विजुअल एंड एंटरटेंमेन्ट समिट (वेव्स) का आयोजन करते समय गेमिंग उद्योग के हितधारकों के साथ उनकी चिंताओं के बारे में कोई परामर्श किया है ।

सूचना और प्रसारण एवं संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने बताया कि भारत सरकार ने मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र में पायरेसी से संबंधित शिकायतों से निपटने करने के लिए विभिन्न तंत्र और नीतियां स्थापित की हैं। इन पहलों का उद्देश्य बौद्धिक संपदा अधिकारों की रक्षा करना, डिजिटल पायरेसी पर अंकुश लगाना और उद्योग में हितधारकों की रक्षा करना है। उद्योग की चिंताओं के समाधान हेतु, चलचित्र अधिनियम, 1952 को वर्ष 2023 में संशोधित किया गया था, ताकि फिल्मों की अनधिकृत रिकॉर्डिंग और प्रदर्शन के मुद्दों से निपटने के लिए प्रावधान शामिल किया जा सके, ये संशोधन मौजूदा कानूनों अर्थात् प्रतिलिप्यधिकार अधिनियम, 1957 और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी) 2000 के पूरक हैं जो फिल्म पायरेसी के मुद्दे को संबोधित करते हैं। इन प्रावधानों के अंतर्गत, सूचना और प्रसारण मंत्रालय तथा केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड में एक संस्थागत तंत्र स्थापित किया गया है, जिसके तहत चलचित्र फिल्मों के मूल प्रतिलिप्यधिकार धारकों या उनके द्वारा अधिकृत व्यक्तियों और किसी अन्य व्यक्ति से इंटरनेट पर फिल्मों की पायरेटेड/इन्फ्रेिंजिंग प्रतियों के प्रदर्शन के संबंध में शिकायतें प्राप्त करना और ऐसे लिंकों तक पहुंच को डिसेबल करने के लिए मध्यस्थों को अधिसूचना जारी करना शामिल है।

इसके अलावा, भारत सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत दिनांक 25.02.2021 को सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया, आचार संहिता) नियम, 2021 अधिसूचित किया है। इन नियमों में अन्य बातों के साथ-साथ, डिजिटल समाचार प्रकाशकों और ओटीटी प्लेटफार्मों के प्रकाशकों के लिए आचार संहिता और आचार संहिता के उल्लंघन से संबंधित शिकायतों के निवारण के लिए तीन स्तरीय संस्थागत तंत्र का प्रावधान है। आचार संहिता के अनुसार ओटीटी प्लेटफार्मों को ऐसी कोई भी सामग्री प्रसारित नहीं करनी चाहिए जो कॉपीराइट अधिनियम, 1957 सहित उस समय लागू किसी भी कानून द्वारा निषिद्ध हो या जिसे किसी सक्षम न्यायालय द्वारा निषिद्ध किया गया हो। चलचित्र अधिनियम में फिल्मों की पाइरेसी के खिलाफ सख्त सजा के प्रावधान शामिल किए गए हैं, जिसमें न्यूनतम 3 महीने की कैद और 3 लाख रुपये का जुर्माना निर्धारित किया गया है, जिसे 3 साल की कैद और लेखापरिक्षित सकल उत्पादन लागत के 5ः तक जुर्माना बढ़ाया जा सकता है।

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